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Chandrayaan-3 से मिले 55 जीबी से अधिक मूल्यवान आंकड़े, कई रहस्यों से उठेगा पर्दा

Chandrayaan-3: देश के सबसे सफल अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर लैंड करने के बाद 55 गीगाबाइट (55 जीबी) से अधिक आंकड़े मुहैय्या कराए हैं।

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Chandrayaan-3: देश के सबसे सफल अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर लैंड करने के बाद 55 गीगाबाइट (55 जीबी) से अधिक आंकड़े मुहैय्या कराए हैं। अब इसका विश्लेषण अब दुनियाभर के वैज्ञानिक कर सकेंगे और चंद्रमा के नए रहस्यों से पर्दा उठाया जा सकेगा। पहले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ये आंकड़े वैज्ञानिक समुदाय के लिए जारी कर दिए।

चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान की उतारी गई कई तस्वीरें इसरो अभी जारी करेगा जो पहली बार दुनिया के सामने आएंगी। लेकिन, कुछ ऐसे अनदेखे फोटोग्राफ जारी भी किए गए हैं जिसे लैंडर और रोवर ने अपने 14 दिन के मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह पर उतारे। रोवर इमेजर की ली गई तस्वीरों में यह साफ दिखता है कि, भारत ने किस तरह चंद्रमा की सतह पर अमिट छाप छोड़ी है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रु्व के पास जिस स्थान पर लैंडर विक्रम को उतारा गया था उसका नामकरण शिवशक्ति प्वाइंट के तौर पर किया गया। रोवर ने शिवशक्ति प्वाइंट पर चहलकदमी करते हुए अपने अनूठे निशान छोड़े, जिसमें भारत का राष्ट्रीय चिन्ह भी है।

अनंत काल तक रह सके हैं निशान

हालांकि, राष्ट्रीय चिह्न उतनी स्पष्टता के साथ नहीं उकेरी जा सकी क्योंकि, चंद्रमा की मिट्टी उम्मीदों के अनुरूप नहीं निकली। लेकिन, रोवर के निशान में राष्ट्रीय चिन्ह कहां है यह समझा जा सकता है। चूंकि, चंद्रमा पर वातावरण नहीं है, इसलिए माना जा रहा है कि, ये निशान अनंत काल तक चंद्रमा पर उसी अवस्था में पड़े रहेंगे। चंद्रमा पर वातावरण नहीं होने के चलते ही यह समझा जाता है की उसकी उत्पत्ति के कई रहस्य उसी अवस्था में वहां पड़े हैं जिस अवस्था में निर्माण काल के दौरान थे। इसलिए भी चंद्रमा अन्वेषण का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है।

पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया

इस बीच चंद्रयान-3 के लैंडिंग के एक साल पूरे होने पर दिल्ली स्थित भारत मंडपम में पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य विज्ञान और वैज्ञानिक सोच आम आदमी तक पहुंचाना था ताकि वे इसे जानें और उसका लाभ उठा सकें। साथ ही, युवा वैज्ञानिक सोच विकसित कर सकें। इस अवसर पर इसरो की पिछले छह दशक की गौरवपूर्ण उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर व्यापक विचार विमर्श हुआ। कई सत्रों में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ परिचर्चा का आयोजन किया गया।

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