10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

मध्यप्रदेश में बनेगा नेशनल पेसा इंस्टीट्यूट, पूरे देश के आदिवासियों को साधने की बनेगा धुरी

पेसा एक्ट के लिए दस राज्यों को फोकस करके काम होना है। इसमें मध्यप्रदेश अव्वल है। दस में से दो राज्य ओडिशा व झारखंड ऐसे हैं, जिन्होंने अभी पेसा एक्ट लागू नहीं किया। पढ़ें जितेन्द्र चौरसिया की रिपोर्ट...

2 min read
Google source verification

भारत

image

Ashib Khan

Jul 24, 2025

आदिवासियों को साधने का नेशनल पेसा इंस्टीट्यूट बनेगा धुरी (Photo-IANS)

पूरे देश के आदिवासियों के उत्थान और राजनीतिक तौर पर उन्हें साधने की धुरी अब मध्यप्रदेश बनेगा। दरअसल, मध्यप्रदेश में अब नेशनल पेसा एक्सीलेंस इंस्टीट्यूट बनाने की तैयारी हो गई है। यह सेंटर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित आदिवासी बाहुल्य वाले दस प्रमुख राज्यों को फोकस करके काम करेगा। इस सेंटर पर आदिवासियों के उत्थान को लेकर रणनीति बनाने से लेकर स्टडी व ट्रेनिंग सहित अन्य काम होंगे। अभी तक पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नौ मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। यह इंस्टीट्यूट इसलिए भी बेहद अहम है कि भाजपा के लिए आदिवासी समुदाय में पैठ बढ़ाना सियासी तौर पर जरूरी है।

कितने काम का और क्या रहेगा असर

पेसा एक्ट के लिए दस राज्यों को फोकस करके काम होना है। इसमें मध्यप्रदेश अव्वल है। दस में से दो राज्य ओडिशा व झारखंड ऐसे हैं, जिन्होंने अभी पेसा एक्ट लागू नहीं किया है। दोनों राज्यों में ड्राफ्ट बन चुका है। बाकी आठ राज्य लागू कर चुके हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान व तेलंगाना है। 

मध्यप्रदेश का चयन क्यों

केंद्र सरकार ने छह महीने की भारी मशक्कत के बाद इस सेंटर को मध्यप्रदेश में बनाना तय किया है। मध्यप्रदेश का चयन तीन प्रमुख कारणों से हुआ हैः पहला- पेसा एक्ट के क्रियान्वयन में नंबर वन राज्य होना, दूसरा- आदिवासी बाहुल्यता में नंबर वन होना, और तीसरा- 16 राज्यों की स्पर्धा में मध्यप्रदेश की राष्ट्रीय इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी का प्रेजेंटेशन सबसे बेहतर पाया जाना। यह इंस्टीट्यूट मध्य प्रदेश के अमरकंटक में खोलना तय किया गया है। 

कैसा होगा इंस्टीट्यूट

इस इंस्टीट्यूट का एक चेयरपर्सन होगा। बाकी करीब एक दर्जन दूसरे सदस्य पदाधिकारी होंगे। इसकी बिल्डिंग, रिसर्च टीम सहित पूरी प्रशासनिक सेल होगी। बड़ी संख्या में इससे रोजगार भी मिलेगा। क्योंकि नेशनल इंस्टीट्यूट के बाद इसके राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय व उससे नीचे सेंटर भी आगे चलकर बनाए जाएंगे। इसे लेकर केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग, मध्यप्रदेश सरकार और नेशनल इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी में एमओयू होगा। इसके बाद करीब छह महीने में इस पर जमीनी काम शुरू हो जाएगा।

क्या काम करेगा इंस्टीट्यूट-

  • पेसा एक्ट के क्रियान्वयन पर स्टडी व वर्किंग मॉड्यूल तैयार करना
  • पूरे देश के आदिवासियों की समस्याओं को लेकर स्टडी
  • आदिवासी समस्याओं को दूर करने के मॉड्यूल तैयार करना
  • आदिवासी वर्ग के कामों पर अफसर-कर्मचारी ट्रेनिंग
  • आदिवासी जागरूकता पर सम्मेलन-कार्यशाला-कैम्पेन आदि
  • आदिवासी उत्थान पर मॉड्यूल तैयार करना व उसका क्रियान्वयन

आदिवासी वोटबैंक अहम

देश में करीब 10.42 करोड़ आदिवासी हैं। सियासी तौर पर वोटबैंक की दृष्टि से ये बेहद अहम हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक आदिवासी वोटबैंक अभी तक भाजपा की पकड़ से कुछ दूर है। 2018 में मध्यप्रदेश में भाजपा सत्ता से दूर रहने के पीछे सबसे बड़े कारणों में आदिवासी व दलित वोट न मिलना मानती है। 

सियासी नजर

  • 47 आदिवासी आरक्षित लोकसभा सीट हैं देश में
  • 06 आदिवासी लोकसभा सीट हैं, मप्र की 29 में से

संबंधित खबरें

  • 558 आदिवासी विधानसभा सीट हैं, देश की कुल 4123 विधानसभा सीट में से
  • 47 आदिवासी विधानसभा सीट हैं, मप्र की कुल 230 में से

फैक्ट फाइल

  • 10.45 करोड़ आदिवासी देश में कुल
  • 1.53 करोड़ सबसे अधिक आदिवासी मध्यप्रदेश में
  • 21.09 फीसदी आदिवासी मप्र की कुल आबादी में
  • 08.00 फीसदी आदिवासी देश की कुल आबादी में
  • 30 राज्यों में है आदिवासी समुदाय देश में
  • 10 राज्यों में प्रमुख तौर पर आदिवासी समुदाय

क्या है पेसा

पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 को पेसा एक्ट कहते हैं। यह अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाने, संरक्षण करने व उत्थान के लिए बना है। इसमें पंचायतों में ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार दिए गए हैं, खास तौर पर पंचायत क्षेत्र में खनन और प्राकृतिक संसाधन से संबंधित भी।