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20 साल का सूखा खत्म, अब आई दोस्ती की नई आंधी! पीएम मोदी और साइप्रस के बीच ये 5 समझौते बदल देंगे दुनिया का नक्शा

Hyderabad House Dialogue: प्रधानमंत्री मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति के बीच दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, AI और फिनटेक सहित 5 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी है।

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भारत

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MI Zahir

May 22, 2026

PM Modi, Cyprus President Nikos Christodoulides talks

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलाइड्स के बीव बातचीत (। फोटो: ANI)

India Cyprus Relations : भारत और साइप्रस के बीच सदियों पुराने दोस्ताना रिश्तों को एक नई ऊंचाई देने के लिए दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर आए साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के बीच द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के मोर्चे पर सहयोग की एक नई स्क्रिप्ट लिखना है।

इन दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ महामंथन

इस रणनीतिक बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारतीय पक्ष से विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों पर विशेष फोकस रहा। दोनों देशों के बीच डिफेंस (रक्षा), सुरक्षा, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यावरण, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुंबई से शुरू हुआ था सफर, दिल्ली में लगी मुहर

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स अपने इस चार दिवसीय दौरे के पहले चरण में बुधवार को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंचे थे। वहां महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका भव्य स्वागत किया था। मुंबई में राष्ट्रपति निकोस ने एक बड़े 'बिजनेस फोरम' को संबोधित किया, जिसका मकसद दोनों देशों के निवेशकों को एक मंच पर लाना था। मुंबई में व्यापार की जमीन तैयार करने के बाद, राष्ट्रपति गुरुवार को दिल्ली पहुंचे, जहाँ अब कूटनीतिक समझौतों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

जून 2025 की यात्रा का दिख रहा है असर

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति निकोस की यह यात्रा दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जून 2025 में हुई साइप्रस की ऐतिहासिक यात्रा का अगला पड़ाव है। जून 2025 में पीएम मोदी दो दशकों में साइप्रस जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। उस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को जो रफ्तार दी थी, उसे अब और मजबूत किया जा रहा है। रणनीतिक रूप से यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि साइप्रस इस समय यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता कर रहा है, जिससे भारत के लिए पूरे यूरोप के बाजार में पैठ बनाना आसान हो जाएगा।

राष्ट्रपति भवन में खास स्वागत और भोज

इस राजकीय यात्रा के सम्मान में प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी मेहमानों के लिए दोपहर के विशेष भोज का आयोजन किया। वहीं, शाम को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में साइप्रस के राष्ट्रपति का औपचारिक स्वागत करेंगी और उनके सम्मान में एक शानदार आधिकारिक राजकीय रात्रिभोज की मेजबानी करेंगी। साल 2027 में दोनों देश अपनी कूटनीतिक दोस्ती के 65 साल पूरे करने जा रहे हैं, ऐसे में यह दौरा वैश्विक राजनीति के लिहाज से गेमचेंजर साबित हो सकता है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान

'साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। भारत-साइप्रस संबंधों और भारत-यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए उनके विचार और कूटनीतिक मार्गदर्शन सराहनीय हैं।' इस बैठक के बाद अब दोनों देशों के तकनीकी और व्यापारिक दल फिनटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने की तैयारी करेंगे। साथ ही रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच साझा अभ्यास और सैन्य तकनीक साझा करने पर अगले महीने एक और दौर की वार्ता हो सकती है।

यूरोपीय संघ का द्वार बनेगा साइप्रस

भूमध्य सागर में स्थित साइप्रस की भौगोलिक स्थिति कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता साइप्रस के पास होने के कारण, भारत इस मौके का फायदा भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत को गति देने में उठा सकता है। यह चीन के बढ़ते वैश्विक व्यापारिक प्रभाव को संतुलित करने में भारत की मदद करेगा। (इनपुट: ANI)।