
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट (इमेज सोर्स: ANI एक्स)
Great Nicobar Island Development: भारत सरकार रणनीतिक रूप से बेहद अहम ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर लगभग 92 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। यह महत्वपूर्ण जलमार्ग मलक्का स्ट्रेट के बेहद नजदीक स्थित है। जहां से दुनिया का 30 फीसदी समुद्री व्यापार होता है। इस प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। लेकिन बीते दिनों लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पर सवाल उठाए और ग्रेट निकोबार द्वीप पर गए भी। ऐसे में जानते इस प्रोजेक्ट और इससे जुड़े विवाद के बारे में।
अंडमान निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार पर तीन चरणों में यह प्रोजेक्ट बनेगा। इसमें एक बड़े पोर्ट का निर्माण होगा। इसके अलावा एक नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सिविल व डिफेंस उपयोग के लिए। 450 मेगावाट का गैस व सोलर पावर प्लांट व एक नई टाउनशिप विकसित की जाएगी। कुल मिला कर द्वीप के 166 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में विकासकार्य होंगे।
रणनीतिक रूप से अहम यह प्रोजेक्ट से भारत चीन के व्यापार और तेल आयात पर निगरानी कर सकेगा। जरूरत पड़े तो इसे चोक प्वाइंट की तरफ भी इस्तेमाल कर सकेगा। यहां पोर्ट बनने से भारत को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के लिए विदेशी पोर्ट जैसे कोलंबो व सिंगापुर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे भारत की बचत होगी। 2040 तक सलाना 30 हजार करोड़ रुपए का लाभ हो सकता है। यह द्वीप व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा का हब बन सकेगा।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार पर आरोप लगाया कि वह पर्यावरणीय तबाही से लोगों का ध्यान भटका रही है। 28 अप्रैल को राहुल गांधी इस द्वीप पर गए थे। प्रोजेक्ट से स्थानीय समुदायों व आदिवासियों की चिंताओं को अनसुना करने का आरोप लगाया। प्रोजेक्ट मे 7.11 लाख पेड़ अलग अलग चरण में काटे जाएंगे। साथ ही समुद्री जीव-जंतुओं भी प्रभावित होंगे। हालांकि सरकार का कहना है कि काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए हरियाणा और मध्य प्रदेश में हजारों हेक्टेयर पर पेड़ लगाए जाएंगे।
Published on:
04 May 2026 03:17 am
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