3 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘सभी अनमोल विरासतें वापस आनी चाहिए’, ब्रिटेन के पास हमारे एक नहीं, कई ‘कोहिनूर’

Kohinoor Diamond: एक बार फिर उन लूटी, खोई या चोरी हुई धरोहरों पर बहस छेड़ दी है जो औपनिवेशिक दौर में भारत से ब्रिटेन पहुंच गई थीं। मांग उठ रही है कि भारत की वे सभी अनमोल विरासतें वापस आनी चाहिए।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Saurabh Mall

May 04, 2026

Diamond kohinoor

'कोहिनूर' की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: वॉलपेपर केव)

Kohinoor Diamond Controversy: ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय की हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान न्यूयॉर्क के भारतीय मूल के मेयर जोहरान ममदानी ने गोलकुंडा के कोहिनूर हीरे को भारत लौटाने की अपील की। इसने एक बार फिर उन लूटी, खोई या चोरी हुई धरोहरों पर बहस छेड़ दी है जो औपनिवेशिक दौर में भारत से ब्रिटेन पहुंच गई थीं। मांग उठ रही है कि भारत की वे सभी अनमोल विरासतें वापस आनी चाहिए, जो कभी यहां की पहचान थीं। कुछ दुर्लभ कलाकृतियों, मूर्तियां और ऐतिहासिक वस्तुओं पर एक नजर…

'अभय मुद्रा' में सुल्तानगंज बुद्ध

बुद्ध को 'अभय मुद्रा' में दर्शाती यह 7.5 फीट ऊंची और 500 किलो से ज्यादा वजनी तांबे की प्रतिमा है, जो 7वीं सदी की मानी जाती है। इसे 1862 में बिहार के भागलपुर में रेलवे निर्माण के दौरान खोजा गया था।

क्या हुआ: ब्रिटिश इंजीनियरों ने इसे इंग्लैंड भेज दिया। यह दुनिया की सबसे बड़ी पूर्ण भारतीय धातु मूर्तियों में गिनी जाती है।
अभी कहां: बर्मिघम म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी

नक्काशीदार अमरावती स्तूप रेलिंग

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में स्थित अमरावती स्तूप तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल था। ये रेलिंग्स चूना पत्थर के स्लैब पर की गई सुंदर नक्काशी हैं, जो पहली शताब्दी ईसा पूर्व से आठवीं शताब्दी ईस्वी के बीच बनाई गई थीं।

क्या हुआ: ब्रिटिश अधिकारियों ने 1859 में इसे 'बचाने' का बहाना कर इन हिस्सों को हटाकर लंदन भेज दिया, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) इन्हें वापस लाने की कोशिश कर रहा है।
अभी कहां: ब्रिटिश म्यूजियम

रणजीत सिंह का स्वर्ण सिंहासन

महाराजा रणजीत सिंह के लिए यह स्वर्ण सिंहासन 1820 के दशक में बनाया गया था। यह लकड़ी और राल के आधार पर सोने की परतों से मढ़ा गया है और अष्टकोणीय आकार में दो-स्तरीय कमल के रूप में उकेरा गया है।

क्या हुआ: 1849 में पंजाब के विलय के दौरान ब्रिटिश सरकार ने इसे 'राजकीय संपत्ति' मानकर जब्त कर लिया और ब्रिटेन ले गए। बार—बार आग्रह के बाद आज तक नहीं लौटाया गया।
अभी कहां: विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम

टीपू का खिलौना ‘टाइगर’

यह मैसूर के शासक टीपू सुल्तान का एक प्रसिद्ध यांत्रिक खिलौना है। इसमें एक बाघ को एक ब्रिटिश सैनिक पर हमला करते हुए दिखाया गया है। एक पीतल के हैंडल को घुमाने पर इससे कराहने जैसी आवाजें आती हैं।

क्या हुआ: 1799 में श्रीरंगपट्टनम की घेराबंदी में टीपू सुल्तान की हार के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों ने इसे लूट लिया और बाद में इसे इंग्लैंड ले गए।
अभी कहां: विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम

धार की प्रतिमा अंबिका या सरस्वती

देवी की चार फुट ऊंची सफेद संगमरमर की मूर्ति है। भारत में कई दावों के अनुसार यह देवी सरस्वती की मूर्ति है जो मध्य प्रदेश के भोजशाला परिसर की है।
क्या हुआ: ब्रिटेन इसे 11वीं शताब्दी की परमार राजवंश के दौरान की जैन यक्षिणी अंबिका की मूर्ति बताता है। इस प्रतिमा को 1880 के दशक में ब्रिटेन ले जाया गया था।
अभी कहां: ब्रिटिश म्यूजियम

भारत लड़ रहा वापसी की लड़ाई

ब्रिटेन के ब्रिटिश म्यूजियम एक्ट, 1963 जैसे एक्ट धरोहरों की स्थायी वापसी में बाधा बनते हैं, क्योंकि इन कानूनों के अनुसार संग्रहालयों से वस्तुएं हटाई नहीं जा सकती। वहीं, ब्रिटेन की सरकारों की भी नीयत बदलती रहती है। हालांकि, हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और नैतिक बहस के चलते कई देशों को उनकी धरोहरें लौटाई गई हैं। भारत भी कूटनीतिक और कानूनी रास्ते से अपनी विरासत वापस लाने की कोशिश कर रहा है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग