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क्या केरलम में होने वाला है बड़ा ‘खेला’? शशि थरूर ने CM पद को लेकर खोल दिया सबसे बड़ा राज!

Kerala Elections: केरल चुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कांग्रेस में सीएम चुनने की प्रक्रिया बताई और लेफ्ट के पूरे देश से साफ़ होने की भविष्यवाणी भी की।

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भारत

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MI Zahir

May 03, 2026

Shashi Tharoor

कांग्रेस नेता शशि थरूर (सोर्स: ANI)

Elections: केरल में चुनाव नतीजों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं । इसी बीच, तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद शशि थरूर ने मुख्यमंत्री पद को लेकर एक बेहद अहम और कूटनीतिक बयान दिया है। जब उनसे सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि क्या कोई मौजूदा सांसद राज्य का मुख्यमंत्री बन सकता है, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में इसका जवाब दिया। थरूर ने सीधे 'हां' या 'ना' कहने के बजाय कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी चयन प्रक्रिया का विस्तार से जिक्र किया।

क्या है कांग्रेस में सीएम चुनने की प्रक्रिया ?

शशि थरूर ने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री चुनने की एक स्थापित और पुरानी परंपरा है। उन्होंने बताया कि चुनाव नतीजे आने के बाद, जीतने वाले सभी विधायकों से मुलाकात करने के लिए पार्टी अध्यक्ष की ओर से एक विशेष प्रतिनिधि या पर्यवेक्षक भेजा जाता है। यह प्रतिनिधि विधायकों की राय और उनकी भावनाओं को जानने की कोशिश करता है। विधायकों का मूड भांपने के बाद वह पर्यवेक्षक वापस दिल्ली लौटता है और कांग्रेस हाईकमान को पूरी रिपोर्ट सौंपता है।

हाईकमान का फैसला होता है अंतिम

थरूर ने आगे स्पष्ट किया कि विधायकों की राय जानने के बाद अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान ही लेता है। उन्होंने एक बेहद खास बात कही कि इसके बाद आलाकमान किसी भी नियम या सीमा से बंधा नहीं होता है। वे जिसे चाहें, उसे चुन सकते हैं और यह पूरी तरह से उन पर निर्भर करता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि थरूर का यह बयान इस बात का सीधा संकेत है कि अगर हाईकमान चाहे, तो किसी सांसद को भी मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप सकता है।

वामपंथियों के सफाये की भविष्यवाणी

मुख्यमंत्री पद की बात के अलावा, शशि थरूर ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि कल (नतीजे आने के बाद) जो सबसे बड़ी खबर सामने आएगी, वह यह होगी कि वामपंथी गठबंधन देश में अब कहीं भी सत्ता में नहीं रहेगा। थरूर ने 2011 के चुनावों का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि जब कांग्रेस ने केरल में जीत हासिल की थी, तब एलडीएफ केरल और बंगाल दोनों जगह हार गया था, लेकिन कम से कम त्रिपुरा में उनकी सरकार बची हुई थी।

देश की राजनीति में होगा बड़ा बदलाव

थरूर ने जोर देकर कहा कि इस बार स्थिति बिल्कुल अलग होने वाली है। उनके मुताबिक, अगर केरल से एलडीएफ की विदाई होती है, तो पूरे भारत में उनकी कहीं भी सरकार नहीं बचेगी। यह भारतीय राजनीति के लिहाज से एक बहुत बड़ा घटनाक्रम होगा। यह बयान दिखाता है कि कांग्रेस इस बार केरल में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है और वामपंथी दलों के गिरते ग्राफ पर सीधा निशाना साध रही है।

थरूर ने खुद को मुख्यमंत्री पद की रेस में बनाए रखा

शशि थरूर के इस बयान पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने बहुत ही चतुराई से खुद को मुख्यमंत्री पद की रेस में बनाए रखा है। हाईकमान के विशेषाधिकार का जिक्र कर के उन्होंने यह संदेश दिया है कि पार्टी नेतृत्व कोई भी चौंकाने वाला फैसला ले सकता है।

लेफ्ट पार्टियों के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन गया

बहरहाल, अब सबकी निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हुूई हैं। नतीजों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान केरल में पर्यवेक्षक बनाकर किसे भेजता है और विधायकों की राय में किस नेता का पलड़ा भारी रहता है। लेफ्ट पार्टियों के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। अगर वामपंथी दल केरल में हार जाते हैं, तो पूरे भारत में उनकी एक भी राज्य सरकार नहीं बचेगी। यह भारत के वामपंथी आंदोलन के इतिहास में सबसे बड़ा और निराशाजनक मोड़ साबित होगा।