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NEET UG 2026 Paper Leak: अभियुक्तों के बैंक खातों को खंगाल रही CBI, कोचिंग और पेपर प्रैक्टिस के नाम पर पेरेंट्स से वसूली गई मोटी रकम

NEET UG 2026 Paper Leak: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में CBI अब आरोपियों के बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की जांच में जुट गई है। जांच में सामने आया है कि कोचिंग और पेपर प्रैक्टिस के नाम पर अभिभावकों से भारी रकम वसूली गई। लातूर और सीकर से जुड़े दो बड़े नेटवर्क के जरिए पेपर लीक कर देशभर में बेचे जाने के आरोप हैं।

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भारत

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Rahul Yadav

May 24, 2026

NEET UG 2026 Paper Leak

NEET UG 2026 Paper Leak (AI Image)

NEET UG 2026 Paper Leak: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में प्रोफेसरों की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अब पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच में जुट गई है। जांच एजेंसी सभी अभियुक्तों के बैंक खातों और ट्रांजेक्शन को खंगाल रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कोचिंग, स्पेशल पेपर प्रैक्टिस और ‘गेस पेपर’ के नाम पर अभिभावकों से भारी रकम वसूली गई थी।

सीबीआइ को शक है कि महाराष्ट्र के लातूर से जुड़ा यह नेटवर्क पहले भी कई पेपर लीक मामलों में शामिल रहा हो सकता है। राजस्थान के कोटा की तरह लातूर भी देश का बड़ा कोचिंग हब माना जाता है, जहां मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए हजारों छात्र पहुंचते हैं।

दो बड़े नेटवर्क के जरिए लीक हुआ पेपर

जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का पूरा खेल दो अलग-अलग नेटवर्क के जरिए संचालित किया गया।

पहला नेटवर्क लातूर का था, जिसे कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगावकर प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी की मदद से चला रहा था। दूसरा नेटवर्क राजस्थान के सीकर से जुड़ा था, जिसे प्रोफेसर मनीषा मांढरे और ब्यूटीशियन मनीषा बाघमारे के जरिए संचालित किया गया।

ऐसे हुआ पूरा पेपर लीक

जांच एजेंसियों के अनुसार दिल्ली में केमिस्ट्री के रिटायर्ड प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी, प्रोफेसर मनीषा मांढरे और प्रोफेसर मनीषा संजय हवलदार पेपर सेटिंग प्रक्रिया में शामिल थे।

आरोप है कि पेपर तैयार करने के बाद ये लोग सवालों को याद कर अपनी किताबों में विशेष निशान लगाते थे। इसके बाद पीवी कुलकर्णी ने कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगावकर के संपर्क में आकर पेपर लीक की साजिश रची।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रोफेसर मनीषा मांढरे ने फिजिक्स की प्रोफेसर मनीषा संजय हवलदार को भी इसमें शामिल किया, जिससे पूरे प्रश्नपत्र का सेट तैयार हो गया। बाद में यह जानकारी मोटेगावकर तक पहुंचाई गई।

ब्यूटीशियन के जरिए सीकर तक पहुंचा पेपर

सीबीआइ के मुताबिक प्रोफेसर मनीषा मांढरे ने पेपर की जानकारी अपनी मित्र और ब्यूटीशियन मनीषा बाघमारे को दी। इसके बाद यह लीक पेपर धनंजय लोखंडे और शुभम खैरनार तक पहुंचा।

यहीं से पेपर पुणे, गुरुग्राम और राजस्थान के सीकर तक बेचा गया। जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क के जरिए कई अभिभावकों और छात्रों से लाखों रुपये वसूले गए।

बैंक खातों और पैसों के स्रोत की जांच

सीबीआइ अब सभी आरोपियों के बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और नकद लेनदेन की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक के बदले कितनी रकम ली गई और यह पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा।

जांच एजेंसियों के अनुसार कई अभिभावकों ने बच्चों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए मोटी रकम देकर पेपर खरीदने की कोशिश की थी।

पुराने पेपर लीक से भी जोड़े जा रहे तार

सीबीआइ को शक है कि यह नेटवर्क केवल NEET-UG 2026 तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी अब पुराने परीक्षा घोटालों और कोचिंग नेटवर्क से भी इसके तार जोड़कर देख रही है। जांच के दायरे में कई कोचिंग सेंटर, एजेंट और बिचौलिए भी आ सकते हैं।

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