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केरलम विधानसभा चुनाव में BJP का भगवा लहराने वाले गोपाकुमार कौन हैं? मिस्ड कॉल ड्राइव के जरिए पार्टी से जुड़े थे

Kerala Assembly Election 2026 में BJP नेता बीबी गोपाकुमार ने चथन्नूर सीट पर CPI को हराकर बड़ी जीत दर्ज की। मिस्ड-कॉल सदस्यता अभियान से जुड़े गोपाकुमार अब केरल भाजपा का नया उभरता चेहरा बनकर सामने आए हैं।

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BB Gopakumar

बीबी गोपाकुमार ने केरलम के चथन्नूर विधानसभा सीट पर CPI उम्मीदवार आर राजेंद्रन को हराकर जीत हासिल की है। (Photo/ANI)

MLA BB Gopakumar: केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में बीबी गोपाकुमार ने केरल विधानसभा चुनाव में एक ऐसी जीत दर्ज की है, जिसने राज्य की राजनीति में BJP के लिए नई उम्मीद जगा दी है। पार्टी के मिस्ड-कॉल सदस्यता अभियान के जरिए BJP से जुड़े गोपाकुमार अब केरल में भाजपा के उभरते चेहरों में गिने जा रहे हैं।

इसकी वजह यह है कि 60 वर्षीय गोपाकुमार ने चथन्नूर विधानसभा सीट पर CPI उम्मीदवार आर राजेंद्रन को हराकर जीत हासिल की। यह सीट 2006 से लगातार वामपंथियों के कब्जे में थी। चथन्नूर को लंबे समय से CPI का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, ऐसे में BJP की यह जीत बेहद अहम मानी जा रही है।

पेशे से गोपाकुमार एक शिक्षक रहे हैं और एझवा समुदाय के संगठन द्वारा संचालित SN ट्रस्ट स्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हैं। राजनीति में आने से पहले वह कांग्रेस से जुड़े हुए थे और करीब तीन दशक पहले स्थानीय निकाय सदस्य के तौर पर भी काम कर चुके हैं। मार्च 2016 में उन्होंने BJP के मिस्ड-कॉल सदस्यता अभियान के जरिए पार्टी की सदस्यता ली थी। इसके बाद RSS नेतृत्व ने उन्हें चथन्नूर सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला किया।

आपको बता दें कि केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में BJP की जीती गई तीन विधानसभा सीटों में से एक चथन्नूर भी थी। अन्य दो सीटें नेमोम और कजहकूटम मुख्य रूप से इसलिए चर्चा में रहीं, क्योंकि पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन ने वहा से चुनाव लड़ रहे थे।

लगातार दो हार के बाद मिली बड़ी जीत

गोपाकुमार ने 2016 के विधानसभा चुनाव में चथन्नूर सीट पर 24.92% वोट हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया था। उस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन CPI के जी एस जयलाल अपनी सीट बचाने में सफल रहे।

इसके बाद 2021 में भी गोपाकुमार चथन्नुर सीट से चुनाव मैदान में लड़ने का फैसला किया। यहां उन्होंने BJP का वोट शेयर बढ़ाकर 30.61% तक पहुंचा दिया, हालांकि उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा। इस सीट पर दो हार के बावजूद उन्होंने क्षेत्र में लगातार सक्रियता बनाए रखी और हिम्मत नहीं हारी

गोपाकुमार का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में उन्होंने हर स्थानीय मुद्दे पर जनता के बीच जाकर काम किया और यह संदेश दिया कि BJP यहां गंभीर दावेदार है। इस बार प्रधानमंत्री पीएम मोदी के विकास एजेंडे और LDF सरकार के खिलाफ नाराजगी का फायदा BJP को मिला।

यह रणनीति बनी जीत की वजह

चथन्नूर सीट पर BJP का चुनाव प्रचार बहुत ही सटीक तरीके से और बिना अधिक शोर-शराबे के चलाया गया। पार्टी ने बड़े रोड शो और विशाल रैलियों से दूरी बनाई। RSS कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर फोकस करते हुए घर-घर संपर्क अभियान चलाया।

इसके लिए उन्होंने 196 बूथों में से 176 बूथों पर मजबूत समर्थक आधार तैयार किया। उन्होंने संघ कार्यकर्ताओं के जरिए चुनाव प्रचार के दौरान हर घर तक कई बार पहुंच बनाई। उनकी रणनीति यह थी कि ज्यादा आक्रामक प्रचार से कहीं विपक्षी वोटों का कहीं ध्रुवीकरण न हो जाए।

हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाने में मिली सफलता

चथन्नूर में BJP की जीत का एक और खास पहलू यह है कि पार्टी का इस चुनाव क्षेत्र में किसी भी स्थानीय निकाय पर नियंत्रण नहीं है। इस सीट पर 1.77 लाख मतदाताओं में करीब 45 फीसदी मतदाता एझवा समुदाय से आते हैं। इन मतदाताओं को पारंपरिक रूप से वामपंथियों का समर्थक माना जाता रहा है। वहीं करीब 27% मतदाता नायर समुदाय से हैं। इस क्षेत्र में एझवा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले SNDP योगम और NSS जैसे प्रभावशाली सामाजिक संगठनों की मजबूत पकड़ है।