
संसद (Photo-IANS)
Public Examinations Amendment Bill: देशभर में हाल ही में हुए पेपर लीक के मामलों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेर रहा है। अब इन विरोधों के बीच सरकार पेपर लीक रोकने के लिए नया बिल लाने जा रही है। सोमवार को सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश नामक इस नए बिल को पेश किया गया था और आज संसद में इस पर चर्चा की जाएगी।
सरकार ने इस नए बिल को पेश करते हुए कहा कि यह कानून परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल नया कानून लाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि पहले से मौजूद कानूनों को भी सही तरीके से लागू करना जरूरी है। इसी के चलते बिल पेश होने के बाद विपक्ष ने इसके खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की जिसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के इस विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार इस बिल पर विस्तार से चर्चा करने के लिए राजी हो गई है।
इस दौरान विपक्ष ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग के मुद्दे पर भी सरकार से जवाब मांगा। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं से बातचीत की, जिसके बाद इस बात पर सहमति बनी कि मंगलवार को बिल पर विस्तार से चर्चा होगी। अध्यक्ष ने इस मुद्दे को देश के लाखों छात्रों के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस बिल पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय तय किया है। विपक्ष पहले ही इस विधेयक में 93 संशोधन प्रस्तावित कर चुका है। ऐसे में संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह युवाओं और छात्रों से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक है और सभी सदस्यों को इस पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। वहीं तेलुगु देशम पार्टी के सांसद कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने भी विपक्ष से चर्चा में हिस्सा लेने की अपील करते हुए कहा कि यह देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है।
सरकार का नया विधेयक वर्ष 2024 के मौजूदा कानून में कई बड़े बदलाव करने का प्रस्ताव रखता है। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम पांच साल और अधिकतम दस साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। साथ ही अगर इसमें किसी परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता कंपनी की भूमिका सामने आती है, तो उस पर पांच करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही परीक्षा कराने की पूरी लागत भी उससे वसूली जाएगी और उसे आठ साल तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा से जुड़ा काम नहीं दिया जाएगा। मौजूदा कानून में तीन से पांच साल की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था, जबकि सेवा प्रदाता पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना और चार साल का प्रतिबंध लागू था।
यह पूरा मामला हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों के बाद और ज्यादा राजनीतिक हो गया है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के साथ सख्ती बरतने का आरोप लगाया है और पुलिस कार्रवाई पर जवाब मांगा है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रखने के लिए सख्त कानून जरूरी है। अब सभी की नजर संसद में होने वाली चर्चा पर है, जहां यह तय होगा कि नए कानून में कौन-कौन से बदलाव शामिल किए जाते हैं।
Updated on:
28 Jul 2026 07:39 am
Published on:
28 Jul 2026 07:03 am
