New Parliament Inaugration : नए संसद भवन का पीएम मोदी के उद्घाटन करने को मुद्दा बनाकर कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियों ने 'जंग' छेड़ रखी है। वहीं इस मुद्दे पर मोदी सरकार को 25 दलों का साथ भी मिला है। लेकिन खास बात ये है कि इनमें 7 दल ऐसे हैं जो NDA का हिस्सा नहीं हैं।
Why 7 Non-NDA Parties came in support? नए संसद भवन का पीएम मोदी के उद्घाटन करने को मुद्दा बनाकर कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियों ने 'जंग' छेड़ रखी है। विपक्ष की मांग है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नए संसद भवन का उद्घाटन कराया जाना चाहिए। कार्यक्रम का बहिष्कार कर रही 21 पार्टियों के विरोध के बीच इस मुद्दे पर मोदी सरकार को 25 दलों का साथ मिला है। इसमें खास बात ये है कि इनमें 7 दल ऐसे हैं जो NDA का हिस्सा नहीं हैं। बहुजन समाज पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, जनता दल (एस), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल और तेलुगू देशम पार्टी ने समारोह में शामिल होने पर सहमति दी है। विपक्षी एकता में यह दरार भाजपा नीत NDA गठबंधन के लिए निश्चित तौर पर बड़ी राहत है।
.
| इन दलों ने स्वीकार किया न्योता | इन 21 दलों ने किया बायकॉट |
1- बीजेपी, 2- शिवसेना (शिंदे गुट), 3- नेशनल पीपल्स पार्टी, 4- नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी, 5- सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा, 6- राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी, 7- अपना दल - सोनीलाल, 8- रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, 9- तमिल मनीला कांग्रेस, 10- अन्नाद्रमुक, 11- आजसू (झारखंड), 12- मिजो नेशनल फ्रंट, 13- वाईएसआरसीपी, 14- टीडीपी, 15- बीजद, बीएसपी, 16- जेडीएस, 17- शिरोमणि अकाली दल, 18- नगा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ), 19- मिजो नेशनल फ्रंट, 20- आईटीएफटी (त्रिपुरा), 21- बोडो पीपुल्स पार्टी, 22- पट्टाली मक्कल कच्ची, 23- हाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, 24- अपना दल, 25- असम गण परिषद | 1- कांग्रेस, 2- डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम), 3- AAP, 4- शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), 5- समाजवादी पार्टी, 6- भाकपा, 7- झामुमो, 8-केरल कांग्रेस (मणि), 9- विदुथलाई चिरुथिगल कच्ची, 10- रालोद, 11- टीएमसी, 12- जदयू, 13- एनसीपी, 14- सीपीआई (एम), 15- आरजेडी, 16- AIMIM, 17- AIUDF (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट), 18- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, 19- नेशनल कॉन्फ्रेंस, 20- रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, 21- मरुमलार्ची द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एमडीएमके) |
इन 25 पार्टियों के लोकसभा में 68% यानी 376 सांसद हैं। राज्यसभा में 55% यानी 131 सांसद हैं। समर्थन करने वाली पार्टियां 18 राज्यों यानी 60% राज्यों में सत्ता में हैं। | इन 21 पार्टियों के लोकसभा में 31% यानी 168 सांसद हैं। राज्यसभा में 104 यानी 45% सांसद विरोध में। विरोध करने वाली पार्टियां 40% यानी 12 राज्यों में सत्ता में हैं। |
2 - शिरोमणि अकाली दल (SAD)
कारण
--------
शिरोमणि अकाली दल भले ही वर्तमान में NDA का हिस्सा नहीं है। लेकिन पूर्व में लंबे वक्त तक इसका हिस्सा रहा है। पिछले साल किसानों के मुद्दे पर अकाली दल एनडीए गठबंधन से अलग हो गया था। दूरियां इतनी बढ़ी कि इसके बाद बीजेपी और अकाली दल ने पंजाब में अलग-अलग चुनाव लड़ा और दोनों को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा। चूंकि अब किसानों का मुद्दा भी खत्म हो चुका है। दोनों पार्टियां 2024 की तैयारियों में जुटी हुईं हैं। ऐसे में भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर अकाली दल ने बीजेपी के साथ आने का निर्णय किया है।
तर्क
--------
अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने इस सन्दर्भ में कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन देश के लिए गर्व की बात है, इसलिए हमारी पार्टी उद्घाटन समारोह में शामिल होगी। हम विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों से सहमत नहीं हैं।
4 - लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास)
कारण
--------
यह सभी जानते हैं कि नीतीश कुमार के खिलाफ चिराग पासवान हमेशा मुखर रहे हैं। बीच में लगा था कि नीतीश-तेजस्वी के गठबंधन वाली सरकार में इनकी पार्टी को जगह मिल सकती है। लेकिन वहां भी जगह नहीं मिली। वहीं अब नीतीश बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने में लगे हैं। इसके बाद से चिराग का नीतीश विरोध और तेज हो गया।
चिराग के नेतृत्व वाली लोजपा ने नई संसद के उद्घाटन के मुद्दे पर मोदी सरकार का समर्थन किया है। ऐसा नहीं है कि चिराग पहली बार बीजेपी के पक्ष में खड़े हुए हों, वे कई अवसरों पर पीएम मोदी की खुलकर तारीफ करते रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा 2024 में बीजेपी का समर्थन भी कर सकती है।
तर्क
--------
लोजपा के चिराग पासवान ने साफ कहा कि बहिष्कार की कोई वजह ही नहीं है। हमारी पार्टी इस कार्यक्रम का समर्थन करती है।
यह भी पढ़ें : नई संसद के लिए कहां-कहां से लाई गईं नायाब चीजें
7 - जनता दल-एस (JDS )
कारण
--------
कर्नाटक में किंग मेकर रही पार्टी हालिया चुनाव परिणाम के बाद अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है। उल्लेखनीय है कि वहां कांग्रेस ने इस बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई है। इस बार का अपना हश्र देखते हुए जनता दल (एस) ने कांग्रेस से अलग रास्ता चुना है। माना जा रहा है कि कांग्रेस ने जेडीएस के वोट बैंक में भी सेंध लगाई है। जेडीएस को डर है कि अगर वह कांग्रेस के साथ खड़ी होती है तो उसका बचा हुआ वोट बैंक भी खिसक सकता है। यही वजह है कि पार्टी अब BJP के साथ खड़ी हो गई है।
तर्क
--------
JDS सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने नए संसद भवन के उद्घाटन में भाग लेने का ऐलान किया है। उन्होंने बहुत ही तल्ख लहजे में अपनी बात रखी है। देवेगौड़ा ने विरोध करने वाली पार्टियों से पूछा कि क्या यह बीजेपी और आरएसएस का कार्यालय है जिसके उद्घाटन का बहिष्कार करना है?यह किसी का निजी कार्यक्रम नहीं है, यह देश का कार्यक्रम है।
यह भी पढ़ें : नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद पुरानी पार्लियामेंट का क्या होगा? जानिए सबकुछ