
Sela Tunnel will help a lot to Indian Army: आपको याद होगा कि वर्ष 2022 में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच झड़प हुई थी। यह झड़प तवांग तक जाने वाली सड़क के आसपास हुई थी जो सेला से होकर गुजरती है। तवांग की ओर जाने वाली यह सड़क दरअसल अरुणाचल प्रदेश में लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी दर्रा है। यहां तापमान कभी-कभी -20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। यहां इतनी भारी बर्फबारी होती है कि यहां तक डीजल भी जम जाता है। इन इलाकों की सड़कों से गुजरना असंभव हो जाता है लेकिन अब सेला सुरंग के शुरू होने के बाद यहां पूरे साल किसी भी मौसम में आवाजाही में कोई दिक्कत नहीं होगी। भारतीय सेना को असम के गुवाहाटी और तवांग के बीच साल भर कनेक्टिविटी मिलेगी।
सुरंग बनने 12 किमी. की दूरी कम होगी, 90 मिनट बचेंगे
सेला सुरंग वास्तव में दो या तीन सुरंगें हैं यदि आप दो मुख्य सुरंगों में से लंबी सुरंग के साथ बनी एस्केप सुरंग की गिनती करें। सुरंगें 13,116 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ के बीच से खोदी गई हैं। वे अरुणाचल के पश्चिम कामेंग जिले में तवांग और दिरांग के बीच की दूरी को 12 किलोमीटर तक कम कर देंगे जिसके चलते एक तरफ की दूरी तय करने में लगभग 90 मिनट की बचत होगी। इस परियोजना को इतनी ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी बाय-लेन (दो-लेन) सुरंग कहा जा रहा है। छोटी ट्यूब (T1) की माप 1003.34m और लंबी ट्यूब (T2) की लंबाई 1594.90m है। टी2 की लंबाई के कारण, इसके समानांतर एक 1584.38 मीटर लंबी लेकिन संकरी सुरंग बनाई गई है ताकि यदि कोई गुफा हो तो इससे गुजरने वाले अपना बचाव कर सकें।
इन सुरंगों से गुजरने वालों की सुरक्षा के लिए एक वेंटिलेशन सिस्टम, शक्तिशाली प्रकाश व्यवस्था और अग्निशमन प्रणालियों की व्यवस्था की गई है। यहां से प्रतिदिन 3,000 कार और 2,000 ट्रकों के गुजरने की क्षमता है। वे रणनीतिक महत्व के हैं क्योंकि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पूर्वी क्षेत्र में तेजी से सेना की तैनाती की अनुमति देंगे।
जोरावर टैंक को भारत-चीन सीमा पर पहुंचने में होगी आसानी
वर्ष 2020 और 2022 के बीच पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (Peoples liberation Army China) के साथ सेना की झड़पों के बाद सर्दियों में सैनिकों, हथियारों, आपूर्ति और भारी मशीनरी को आगे के क्षेत्रों में ले जाना प्राथमिकता बन गई थी। सेना ने हाल ही में एलएसी पर तैनाती के लिए जोरावर हल्के टैंकों का आदेश दिया है क्योंकि यह बेहद दुर्गम इलाका है। टी-90, टी-72 और अर्जुन जैसे मुख्य युद्धक टैंकों के लिए इस इलाके में मुश्किलें पेश हो सकती हैं। वहीं ज़ोरावर सीमा पर तेजी से तैनाती के लिए ऐसी सड़कों का उपयोग करने में सक्षम होगा।
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Published on:
09 Mar 2024 11:59 am
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