
अनुराग मिश्रा! नई दिल्ली: पंचकूला कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की विशेष अदालत ने भारतीय करेंसी के फ़र्ज़ी नोटों से जुड़े एक मामले में दो दोषियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई। एनआइए के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण , फ़र्ज़ी नोटों के से जुड़े तमाम सिंडीकेट और रैकेट के ख़िलाफ़ लगातार कार्रवाई कर रहा है।
एनआइए द्वारा विशेष अदालत में पेश इस मामले से जुड़े सबूतों को का गहन निरीक्षण करने के बाद ही कोर्ट ने आरोपियों के ख़िलाफ़ सभी मामला सही पाया। दोनों अभियुक्तों को दोषी क़रार दिया गया। क़ासिम नाम के दोषी को 5 साल 15 दिन का कठोर कारावास के साथ 20, हज़ार रुपये जुर्माना की सज़ा सुनाई । जबकि इस मामले के दूसरे दोषी नजमुद्दीन उर्फ़ नजमू को चार साल दस दिन की कठोर सजा और 20,000 रुपया जुर्माना लगाया गया।
हरियाणा से जुड़े फेक इंडियन करेंसी नोट्स के इस केस में अब तक राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण से लोगों को सजा दिलवाने में सफल रहा है।
कोर्ट द्वारा दोषी क़रार दिए गए क़ासिम और नजमुद्दीन को गुरुग्राम से फेक इंडियन करंसी नोट के साथ गिरफ़्तार किया गया था। क़ासिम को गुरुग्राम के सेक्टर 48 के एक पेट्रोल पंप के पास से गिरफ़्तार किया गया था। जब ये 6 हज़ार रुपये के नक़ली नोट बाज़ार में चलाने की कोशिश कर रहा था। जबकि इसके पास से 1, करोड़20 लाख रुपये बरामद किए गए थे।
क़ासिम ने पूछताछ में कई जानकारियां दी। जिसके आधार पर नजमुद्दीन को गिरफ़्तार किया गया। नजमुद्दीन हरियाणा के नूंह में एक प्रिंटर के ज़रिये नक़ली भारतीय नोटों की छपाई करवाता था। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने छापे के दौरान प्रिंटर और नजमू का लैपटॉप ज़ब्त किया था।
क़ासिम और नजमुद्दीन अपने आकाओं के साथ मिलकर हरियाणा, पंजाब समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में फेक इंडियन करंसी नोटों को कई इलाकों तक ले जाने की साज़िश रच रहे थे।
Published on:
14 Jun 2024 09:43 pm
