26 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

1996 श्रीनगर हिंसा मामले में NIA ने हुर्रियत के 6 बड़े नेताओं के खिलाफ चार्जशीट की दाखिल, अलगाववाद फैलाने का आरोप

NIA Action: एनआईए ने 1996 के श्रीनगर हिंसा मामले में शबीर शाह और यासीन मलिक के करीबियों सहित 6 हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जानिए क्या है पूरा मामला।
2 min read
Google source verification

जम्मू

image

Pratiksha Gupta

image

Dinesh Dubey

Jul 10, 2026

NIA news

Ambala Car Bomb Blast

Kashmir News: कश्मीर में करीब 30 साल पुराने एक बवाल को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बहुत बड़ी कार्रवाई की है। NIA ने साल 1996 के एक मामले में अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के 6 बड़े नेताओं के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह पूरा मामला श्रीनगर में मारे गए एक आतंकी के जनाजे के दौरान हुई भयानक हिंसा, पत्थरबाजी और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर सीधे की गई फायरिंग से जुड़ा हुआ है।

सैयद अली शाह गिलानी सहित इनके नाम

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 1996 में श्रीनगर में आतंकी हिलाल अहमद बेग के जनाजे के दौरान हुई हिंसा और पुलिस पर फायरिंग के मामले में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के छह वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी के नाम शामिल हैं।

क्या है आरोप?

केंद्रीय जांच एजेंसी का आरोप है कि इन नेताओं ने भीड़ को भड़काने, भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगवाने तथा अलगाववाद को बढ़ावा देने की साजिश रची थी। हालांकि, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील के निधन के कारण उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है।

एनआईए के अनुसार, यह मामला 1996 में श्रीनगर में खूंखार आतंकी हिलाल अहमद बेग के अंतिम संस्कार के दौरान हुई हिंसक घटनाओं से जुड़ा है, जिसमें पुलिसकर्मियों पर हमला और फायरिंग की गई थी। एनआईए के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया कि चार्जशीट में शामिल हुर्रियत नेताओं ने अंतिम यात्रा के दौरान मौजूद भीड़ को भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाई। एजेंसी का आरोप है कि उनके उकसावे पर भारत विरोधी, पाकिस्तान समर्थक और अलगाववादी नारे लगाए गए। इतना ही नहीं, नेताओं ने अपने संबोधनों के जरिए सशस्त्र संघर्ष का समर्थन करते हुए लोगों को भड़काने की भी कोशिश की।

जांच एजेंसी के अनुसार, यह पूरी घटना एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा थी। एनआईए का दावा है कि आतंकवादी के जनाजे का इस्तेमाल अलगाववादी एजेंडा फैलाने, केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने, कानून-व्यवस्था को अस्थिर करने, सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा भड़काने और जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रभाव का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से किया गया था। एनआईए ने इस मामले की जांच अप्रैल 2026 में अपने हाथ में ली थी और जांच अभी भी जारी है।