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नीरा राडिया को टेप विवाद में मिली बड़ी राहत, CBI ने दी क्लीन चिट, जांच हुई बंद

टेप विवाद में लॉबिस्ट नीरा राडिया को बड़ी राहत मिली है। इस मामले में केंद्रीय जांच अन्वेषण यानी सीबीआई की ओर से नीरा राडिया को क्लीन चिट दे दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में भी सीबीआई ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही जांच भी बंद कर दी गई है।

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Nira Radia Tapes Case CBI Preliminary Enquiries Ratan Tata Supreme Court

Nira Radia Tapes Case CBI Preliminary Enquiries Ratan Tata Supreme Court

टेप विवाद मामले में नीरा राडिया को बड़ी राहत मिली है। इस मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। खास बात यह है कि, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को इस बात की जानकारी दी है कि टेप हुई बातचीत में कोई भी आपराधिक बात सामने नहीं आई है। इतना ही नहीं सीबीआई ने यह भी बताया है कि टेप में शामिल बातचीत को लेकर जारी 14 शुरुआती जाचों को भी अब कोई सबूत ना होने की वजह से बंद कर दिया गया है। एडीशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बेंच को साल 2015 में कोर्ट की तरफ से दिए गए जांच के आदेश के से जुड़ी रिपोर्ट भी जमा किए जाने की जानकारी दी।

इस मामले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने सुनवाई की। एडीशनल सॉलिसिटर जनरल सर्वोच्च अदालत में बताया कि, 'जांच के दौरान कोई भी आपराधिक बात सामने नहीं आई है।

यही नहीं जांच के नतीजों से जुड़ी एक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। ये रिपोर्ट संबंधित विभागों को भी भेजी गई है।

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अगले हफ्ते कोर्ट में होगी सुनवाई
अब इस मामले पर कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। माना जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसी अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।

क्या है मामला
दरअसल अक्टूबर 2013 में शीर्ष न्यायालय ने एजेंसी को जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने 5 हजार 800 से ज्यादा टेप की गई चर्चाओं की जांच के बाद 14 मुद्दों की पहचान की थी।

सरकार ने वर्ष 2008 से 2009 के बीच कर चोरी की जांच के चलते राडिया की बातों को इंटरसेप्ट किया था। इसके बाद CBI ने संभावित अपराधों का पता लगाने के लिए 14 शुरुआती जांचें शुरू की थीं। अब सीबीआई ने कहा कि, पर्याप्त सबूत ना होने की वजह से इन सभी जांचों को बंद कर दिया गया है।

इससे पहले सीबीआई ने अपनी शुरुआती जांचों में रतना टाटा की मालकियत वाली टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और यूनीटेक जैसे कई बड़े नामों को शामिल किया था।

इसके बाद कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई थीं। उद्योगपति रतन टाटा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि बातचीत को मीडिया में लीक नहीं किया जाना चाहिए।

जबिक, सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन यानी CPIL की तरफ से दी गई याचिका में ट्रांसक्रिप्ट्स को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी।