
NIT कुरुक्षेत्र (फोटो- NIT वेबसाइट)
कुरुक्षेत्र स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) में लगातार हो रही छात्र मौतों ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है। बीते एक महीने में तीन संदिग्ध सुसाइड मामलों ने संस्थान के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। गुरुवार को दूसरे वर्ष के एक छात्र की मौत के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, जिसके चलते छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार, मृत छात्र बिहार के बक्सर जिले का रहने वाला था और उसकी उम्र 20 वर्ष थी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है और मामले की जांच जारी है।
नए मामले के सामने आने के बाद छात्रों में गुस्सा बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे हालात बिगड़े। छात्रों ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन करते हुए मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए।एक छात्र ने कहा कि अकादमिक दबाव, आर्थिक समस्याएं और पारिवारिक अपेक्षाएं मिलकर छात्रों पर भारी तनाव डालती हैं। उनका कहना है कि संस्थान में पर्याप्त मानसिक सहयोग की कमी है, जिससे समस्याएं और बढ़ती हैं।
छात्र परिषद के एक सदस्य ने प्रशासन के कदमों पर सवाल उठाते हुए कहा, फैकल्टी को मेंटर बनाना समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि उन्हें मानसिक स्वास्थ्य का प्रोफेशनल अनुभव नहीं है। संस्थान के जनसंपर्क प्रभारी ने मामले में सफाई देते हुए बताया कि पहले की घटनाओं के बाद कई कदम उठाए गए हैं, जैसे फैकल्टी-स्टूडेंट इंटरैक्शन बढ़ाना, जरूरतमंद छात्रों की पहचान करना और हॉस्टल स्तर पर स्ट्रेस मैनेजमेंट गतिविधियां आयोजित करना। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी और सीमित पहुंच भी लागू की गई है।
हालांकि, प्रशासन ने कैंपस में तनाव बढ़ने पर 17 अप्रैल से 4 मई तक एग्जाम की तैयरी के लिए प्रेप हॉलिडे घोषित कर दिए हैं, जिससे नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। इस फैसले पर छात्रों ने सवाल उठाए हैं, क्योंकि उनका कहना है कि 22 अप्रैल तक निर्धारित कक्षाएं पूरी नहीं हुई थीं और सिलेबस अधूरा है। बता दें कि पिछले दो महीनों में यह चौथी ऐसी घटना है। 16 फरवरी, 31 मार्च और 8 अप्रैल को भी इसी तरह के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने न केवल संस्थान बल्कि पूरे देश में छात्र मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (MoE) द्वारा गठित तीन सदस्यीय समीक्षा समिति जल्द ही संस्थान का दौरा करेगी। समिति छात्र सहायता प्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था और संस्थागत कार्यप्रणाली की जांच करेगी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनवरी 2026 में जारी निर्देशों में सभी संस्थानों को असामान्य मौतों की रिपोर्टिंग अनिवार्य करने और छात्रवृत्ति में देरी पर छात्रों को दंडित न करने की बात कही गई थी।
Published on:
18 Apr 2026 10:22 am
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