
महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद भी मोदी सरकार को होगा फायदा (Photo-IANS)
Women's Reservation Bill: लोक सभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए लाया गया विधेयक गिर गया। बिल को दो-तिहाई बहुमत चाहिए था, लेकिन सिर्फ 298 वोट मिले और 230 के खिलाफ पड़े। बिल के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता ने मोदी सरकार को पहली बार संवैधानिक संशोधन में हार दी। 12 साल में पहली बार ऐसा हुआ है, जब मोदी सरकार सदन में किसी बिल को पास नहीं करा पाई है।
दरअसल, 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (33% महिला आरक्षण) जनगणना और डीलिमिटेशन के बाद लागू होना था। मोदी सरकार ने 2026 में तीन बिल लाकर इसे 2029 लोकसभा चुनाव से लागू करने का रास्ता साफ करने की कोशिश की।
प्रस्ताव था—लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर करीब 850 करना, डीलिमिटेशन को 2011 जनगणना पर आधारित करना और आरक्षण तुरंत लागू करना।
इन विधेयकों को लेकर विपक्ष ने सरकार के एजेंडे पर सवाल उठाए। सदन में वोटिंग से पहले विपक्ष ने एक बैठक की और विधेयक के खिलाफ वोटिंग करने का फैसला लिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन विधेयकों को राजनीतिक मकसद से लाई है, ताकि उन्हें फायदा हो सके।
लोक सभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन वाला बिल गिरने के बाद एनडीए आक्रमक हो गई। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे महिला अधिकारों के खिलाफ है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने वाले बिल का विपक्ष ने समर्थन नहीं किया है। यह बहुत दुख की बात है।
बता दें कि विपक्ष द्वारा इस बिल का समर्थन नहीं करने का अब आगामी विधानसभा चुनाव में फायदा उठाएगी। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल तथा तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। इन दोनों राज्यों में एनडीए विपक्ष को महिला विरोधी बताकर अब चुनाव प्रचार करेगी। यह मुद्दा आगामी लोकसभा चुनाव 2029 में भी भुनाया जा सकता है।
इसके साथ ही शनिवार को एनडीए ने बिल का विरोध करने के बाद विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
पीएम मोदी और अमित शाह पहले ही कह चुके थे कि विरोध करने वालों को लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। इस मुद्दे को लेकर लोकसभा चुनाव 2029 में बीजेपी विपक्ष के खिलाफ महिला विरोधी होने का अभियान भी चला सकती है।
दरअसल, महिला वोटरों को अपनी तरफ के लिए बीजेपी समय-समय पर दांव चलती है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव 2029 से पहले महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लाई है। यदि यह विधेयक संसद में पास हो जाता, तब भी इस मुद्दे को विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भुनाती।
बता दें कि संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। मौजूदा सदन में मोदी सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं था। सरकार को अनुमान था कि छोटे दल और निर्दलीय सांसद इस विधेयक का समर्थन कर सकते है। लेकिन विपक्ष की एकजुटता ने यह विधेयक पास नहीं होने दिया।
Updated on:
18 Apr 2026 09:58 am
Published on:
18 Apr 2026 09:57 am
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