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Delimitation Bill 2026: लोकसभा में सरकार ने बताया राज्यों में कितने प्रतिशत बढ़ेगी सीटें? क्या सीटों का बदलेगा अनुपात

What is Delimitation Bill: विधेयक को पेश करने के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बताया कि सभी राज्यों की सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी की जाएगी।

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भारत

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Ashib Khan

Apr 16, 2026

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राज्यों की सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी- सरकार (Photo-IANS)

Delimitation Bill 2026: गुरुवार से संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश किया। महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन को लागू करने के उद्देश्य से लाए गए इस अहम विधेयक को सदन में मत विभाजन के बाद स्वीकृति दी गई। विधेयक को पेश करने के बाद सदन में हंगामा मच गया। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और सपा सांसद अखिलेश यादव के बीच जमकर बहस हुई। 

सरकार ने बताया राज्यों में कितने प्रतिशत बढ़ेगी सीटें

विधेयक को पेश करने के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बताया कि सभी राज्यों की सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी की जाएगी। इसके तहत लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव है, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। बताया जा रहा है कि फिलहाल जो अनुपात है, वहीं कायम रखा जाएगा।

संसद में पेश हुए तीन बड़े बिल

सरकार ने विशेष सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए—

1- महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधन बिल

2- परिसीमन (Delimitation) बिल

3- केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में संशोधन बिल

जहां कानून मंत्री मेघवाल ने संवैधानिक संशोधन और परिसीमन बिल पेश किए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा संशोधन विधेयक पेश किया।

बिल पर विपक्ष ने उठाए सवाल

बता दें कि सरकार का कहना है कि महिलाओं को लंबे समय से आरक्षण का इंतजार रहा है, इसलिए अब इसे लागू करने का समय आ गया है। हालांकि 2023 में महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पास हो चुका था, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया था।

विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन तो किया है, लेकिन बिल को जल्दबाजी में लाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के कदम देश की संघीय और लोकतांत्रिक संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।

दक्षिणी राज्यों की चिंता

परिसीमन बिल को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका तर्क है कि 1970–90 के दशक में जनसंख्या नियंत्रण के सफल प्रयासों के कारण अब यदि सीटों का पुनर्विन्यास जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं।

वहीं तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने गुरुवार सुबह विधेयक की कॉपी जला दी। इसके अलावा सीएम ने परिसीमन विरोधी आंदोलन की शुरुआत की और काला झंडा दिखाया। 

दक्षिण राज्यों पर क्या फर्क पड़ेगा?

बता दें कि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों की सीमा तय करने की प्रक्रिया है। दक्षिण के राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना) ने परिवार नियोजन में बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे उनकी जनसंख्या वृद्धि कम रही। 2026 के प्रस्तावित परिसीमन (2011 जनगणना आधारित) से उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे उत्तरी राज्यों की सीटें तेजी से बढ़ेंगी, जबकि दक्षिण की सापेक्ष हिस्सेदारी घट सकती है।

इससे संसद में दक्षिण की राजनीतिक ताकत कमजोर होगी, केंद्र की योजनाओं और फंड आवंटन पर प्रभाव पड़ेगा। दक्षिण इसे जनसांख्यिकीय दंड मानता है।