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INDIA ब्लॉक के खिलाफ NDA ने की प्रदर्शन की घोषणा, महिला आरक्षण विधेयक पास न होने पर लिया फैसला

Women's Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में पास न होने के बाद एनडीए ने देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करने का फैसला लिया है, जिससे सत्तारूढ़ और विपक्षी गठबंधनों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

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भारत

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Himadri Joshi

Apr 18, 2026

NDA to protest against INDIA Block

NDA ने की प्रदर्शन की घोषणा (फोटो- आईएएनएस)

Women's Reservation Bill: संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पास नहीं हो सका। इस बिल का उद्देश्य महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देना था, लेकिन यह जरूरी समर्थन हासिल नहीं कर पाया। अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया है, जिससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है।

बिल के पक्ष में 298 वोट, खिलाफ 230

महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में पेश किया गया था, जहां इसे पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। हालांकि, लंबी बहस के बावजूद यह बिल जरूरी समर्थन हासिल नहीं कर सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 वोट इसके खिलाफ गए, जिससे यह पास नहीं हो पाया। इस नतीजे के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी इंडिया गठबंधन (INDIA) के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एनडीए का आरोप है कि विपक्ष ने जानबूझकर इस ऐतिहासिक सुधार को रोक दिया।

देशव्यापी प्रदर्शन और राजनीतिक रणनीति

आरोप प्रत्यारोपों के बाद अब एनडीए नेताओं ने विपक्षी गठबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करने की घोषणा कर दी है। इसके अनुसार सत्ताधारी दल द्वारा शनिवार से देशभर में जिला मुख्यालय स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों की अगुवाई भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला इकाई और भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा करेगी। इस अभियान का मकसद जनता के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। साथ ही यह मुद्दा आने वाले चुनावों, खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रमुख चुनावी मुद्दा बन सकता है।

एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया

बिल के असफल होने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में भी विरोध प्रदर्शन किया और अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। एनडीए नेताओं का कहना है कि यह अभियान विपक्ष की भूमिका को उजागर करने और महिलाओं के समर्थन में जनमत तैयार करने के लिए चलाया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें महिला प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुधार केंद्र में आ गए हैं।