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निजाम काल का 12 किलो सोने का सिक्का, चार दशक पुराने कॉइन को ढूंढने में फिर जुटा भारत

दुनिया का सबसे बड़ी सोने की सिक्के की एक बार फिर खोज शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस सिक्के की ढलाई भारत में ही हुई थी। निजाम काल में इस सिक्के को तैयार किया गया था। बता दें कि सोने की सबसे बड़े सिक्के का वजन 12 किलोग्राम है।

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Nizam Period Gold Coin Of 12 Kg CBI Investigation Again Started Search After 4 decades

Nizam Period Gold Coin Of 12 Kg CBI Investigation Again Started Search After 4 decades

आमतौर आपने 10, 20 या फिर 50 ग्राम के सिस्कों के बारे में तो सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सोना का सबसे बड़ा सिस्के का वजन कितना है? दुनिया का सबसे बड़ा सोना का सिस्का 12 किलोग्राम का है। खास बात यह है कि इस सिक्के का भारत का गहरा कनेक्शन है। इस सिक्के की ढलाई यानी इसे तैयार भारत में ही किया गया था। निजाम काल में तैयार किया गया है ये सिक्का उस दौरान राजा महाराजाओं और निजामों की तिजोरी की शोभा बढ़ाता था। लंबे समय से ये सिक्का गायब है। लेकिन अब भारत ने इस सिक्के को दोबारा खोज शुरू कर दी है। करीब 40 वर्षों बाद सीबीआई दुनिया के इस सबसे बड़े सिक्के की खोज कर रह रही है।

सदियों तक यह सिक्का भारत के राजाओं-नवाबों की तिजोरी की शान बढ़ाता रहा है। अब केंद्र सरकार ने फिर से इस सिक्के की नए सिरे से तलाश शुरू की है।

हैदराबाद के शाही परिवार के पास आखिरी बार दिखा
इस नायाब सिक्के को आखिरी बार हैदराबाद के शाही परिवार के पास देखा गया था। टाइटलर निजाम VIII मुकर्रम जाह के पास ये सिक्का था। हालांकि ये बताया जाता है कि उन्होंने इस सिक्के के बेचने की कोशिश की थी। निजाम ने इस सिक्के को स्विस बैंक में नीलाम करने का प्रयास किया था।

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बताया जाता है कि मुकर्रम को ये सिक्का उनके दादा मीर अली उस्मान अली खान ने दिया था। वहीं जब मुकर्रम ने इस सिक्के को बेचने की कोशिश की तो उस नीलामी के समय सीबीआई ने इसे लोकेट करने का प्रयास किया था, पर सफलता नहीं मिली थी।

हालांकि अब केंद्र सरकार इस सिक्के को दोबारा ढूंढने में जुटी है। चार दशक पहले भी इस सिक्के की खोज शुरू की गई थी, लेकिन तब कुछ कामयाबी नहीं मिली।

जहांगीर ने कराई थी सिक्के की ढलाई
दुनिया के इस नायाब सोने के सिक्के की ढलाई को लेकर कहा जाता है कि ये भारत में ही हुई और इसके करवाने वाले बादशाह जहांगीर थे।

इतिहासकार एवं एचके शेरवानी सेंटर फॉर डेक्कन स्टडीज की प्रोफेसर सलमा अहमद फारूकी के मुताबिक, इस सिक्के को 1987 में जेनेवा में 9 नवंबर को नीलाम करने का प्रयास किया गया था।

यूरोप में मौजूद भारतीय अधिकारियों ने कथित नीलामी की खबर सरकार को दी। बताया गया कि, हैब्सबर्ग फेल्डमैन एसए इस सिक्के को पेरिस स्थित इंडोस्वेज बैंक की जेनेवा शाखा की मदद से नीलाम करने को कोशिश कर रहा था।

CBI ने संभाला मोर्चा
सिक्के की नीलामी की खबर मिलते ही CBI ने इस मामले को अपने हाथों में लिया। जांच शुरू हुई और काफी जानकारियां सामने भी आई, लेकिन सिक्के का पता नहीं चल पाया।

एक नहीं दो सिक्के
12 किलो वजनी सोने के दो सिक्के बनवाए गए थे। ये जानकारी सीबीआई के पूर्व ज्वाइंट डाइरेक्टर शांतनु सेन ने अपनी किताब में दी है। उन्होंने बताया कि बादशाह जहांगीर ने ऐसे दो सिक्के ढलवाए थे। एक सिक्का ईरान के शाह के राजदूत यादगार अली को जबकि, दूसरा हैदराबाद के निजाम के पास आ गया था।

ये आंकी गई सिक्के की कीमत
सीबीआई को जांच में पता चला कि मुकर्रम जाह ने 1987 में स्विस नीलामी में सोने की 2 मुहरें बेचने का प्रयास किया था। उनमें से एक मुहर का वजन 1000 तोला था। 1987 में उस सिक्के की वैल्यू 16 मिलियन डॉलर आंकी गई थी।

इस बात का जिक्र भी शांतनु सेन ने अपनी किताब में किया है। उन्होंने कहा कि अब तो कई साल बीत चुके हैं, लेकिन ऐतिहासिक सिक्के का कुछ पता नहीं चला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शायद केंद्र सरकार के नए प्रयास से दोबारा ऐतिहासिक सिक्का देखने को मिले।

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