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EMI भरने के लिए नोएडा का IT इंजीनियर रैपिडो चलाने को मजबूर; लोगों ने कहा – AI ने ले ली जॉब

बिना स्टेबल इनकम के खर्चे मैनेज नहीं कर पाने की वजह से नोएडा के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल को परिवार को अपने घर भेजना पड़ा और अब वह किराए के अपार्टमेंट में अकेले रहते हैं।

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भारत

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Shaitan Prajapat

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Mohammad Hamid

Nov 25, 2025

Rapido Rider

IT इंजीनियर रैपिडो चलाने को मजबूर (फाइल फोटो)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक सेक्टर से जुड़े लोगों की नौकरियां खाएगा या नहीं, इस पर अब बहस खत्म हो जानी चाहिए, क्योंकि इसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इंस्टाग्राम पर हाल ही में एक रील वायरल हुई, जिसने टेक सेक्टर में नौकरी की असुरक्षा को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।

इस रील में एक शख्स ने बताया कि कुछ दिन पहले नोएडा में रहने वाले उसके दोस्त की नौकरी चली गई जो कि एक IT इंजीनियर है। दो महीने तक जब उसे कोई नई नौकरी नहीं मिली तो मजबूरी में उसे रैपिडो राइडर की नौकरी करनी पड़ी, क्योंकि उसे होम लोन की EMI चुकानी थी।

परिवार को भेजना पड़ा गांव

इंस्टाग्राम यूज़र Nomadic Teju ने वीडियो में बताया कि उसका IT इंजीनियर दोस्त ग्रेटर नोएडा की गौर सिटी में रहता है; उसने बेहतर जॉब की तलाश में अपनी नौकरी छोड़ दी, लेकिन उसके बाद उसे नौकरी मिली ही नहीं। जिस एरिया में वो रहता है वहां फ्लैट्स की कीमत 1–2 करोड़ रुपये है और किराया 30–35 हजार तक जाता है। पहले वह इसी तरह के फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहता था, लेकिन हायरिंग स्लोडाउन की वजह से नौकरी न मिलने पर उसे अपना खुद का फ्लैट किराए पर देना पड़ा। उसने अपना परिवार गांव भेज दिया और खुद पास में ही किराए के घर में शिफ्ट हो गया।

तेजू बताते हैं कि अभी उसकी EMI भी चल रही है, और नौकरी न होने पर गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। खर्चों को संभालने के लिए उनका दोस्त अब Rapido चलाता है और कभी-कभी फ्रीलांस काम भी करता है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो ने सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा छेड़ दी है, खासकर इसलिए क्योंकि AI और हायरिंग में कमी से टेक कर्मचारियों में अनिश्चितता बढ़ रही है। पिछले कुछ सालों में AI की वजह से नौकरियां कम हुई हैं, और हायरिंग फ्रीज और छंटनियां आम हो गई हैं। ऐसे में यह वीडियो उन लोगों से सीधा कनेक्ट हो गया जो इस सेक्टर से जुड़े हैं या जो इस तरह के हालातों से खुद भी गुजर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो पर चर्चा कर रहे हैं कि कैसे AI और हायरिंग फ्रीज की वजह से टेक वर्कर्स मुश्किल में हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह तो बस शुरुआत है, हालात तो इससे भी बदतर होंगे। कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि देश छोड़कर विदेश चले जाना चाहिए, तो कुछ लोग घर खरीदने जैसे बड़े फैसलों से बचने की बात कर रहे हैं। कुछ ने कहा कि जिन पर हाउसिंग लोन है, वे अभी अच्छे रेट पर बेचकर कर्ज चुका दें तो बेहतर रहेगा।

एक यूज़र ने लिखा कि अय्याशी के लिए पर्सनल लोन ले लो, लेकिन प्राइवेट जॉब में 30 साल का होम लोन कभी मत लेना। एक दूसरे यूजर ने लिखा कि फेक लाइफस्टाइल मिडिल क्लास लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। एक अन्य यूजर ने लिखा, 'भाई... मार्केट में जॉब्स हैं, लेकिन लोगों में स्किल ही नहीं हैं। बस GPT से कोड कॉपी कर रहे हैं, असली नॉलेज नहीं है... ऐसे में इंटरव्यू कैसे क्लियर होगा?'

कुछ यूजर्स ने रियल एस्टेट की तेजी से बढ़ती कीमतों को भी इसका दोषी माना। एक यूजर ने लिखा, ‘पांच साल और रुको… ऐसी हालत होगी कि बचाने वाला कोई नहीं मिलेगा।’ कई लोगों का मानना है कि घरों की बढ़ती कीमतें, अस्थिर जॉब मार्केट और AI की चुनौती मिलकर मिडिल क्लास के लिए हालात बदतर कर रहे हैं। यह कहानी आज कई शहरी परिवारों की बढ़ती वित्तीय असुरक्षा को बयान करती है।

भारत बनेगा गिग इकोनॉमी

अभी कुछ दिन पहले मार्सेलस के सौरभ मुखर्जी ने भी चेतावनी दी थी कि भारत में व्हाइट कॉलर जॉब्स खत्म हो जाएंगी और धीरे-धीरे गिग इकोनॉमी बन जाएगा। हाल ही के एक पॉडकास्ट में सौरभ मुखर्जी ने कहा कि भारत अब ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां सुरक्षित ऑफिस जॉब्स कम होती जाएंगी और सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट और गिग वर्क सामान्य बन जाएगा। हर साल लाखों युवा जॉब मार्केट में आते हैं और ऑटोमेशन कंपनियों को बदल रहा है। ऐसे में उनके मुताबिक देश को यह सोचना होगा कि भविष्य में काम और आय का मॉडल कैसे चलेगा।