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मानसून की विदाई में बस इतने दिन बाकी, IMD ने दिया अपडेट, इस सीजन हिमाचल में 43% ज्यादा बारिश

Monsoon Rain End: देश भर में मानसूनी बारिश ने कहर मचाया। अब मौसम विभाग ने मानसून की विदाई की तारीख बता दी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी शुरू कर सकता है। 15 अक्टूबर को कर्नाटक के रास्ते मानसून पूरी तरह से लौट जाएगा।

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Farewell to the monsoon

मानसून की विदाई (फोटो-IMD)

Monsoon Rain End: भारत में मानसून सीजन में बारिश ने जमकर तांडव मचाया है। राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश में बारिश ने तबाही मचाई। भारी बारिश के चलते होने वाले हादसों में पहाड़ी राज्य हिमाचल और उत्तराखंड में 300 से अधिक मौते हुईं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाएं सामने आई। अब मौसम विभाग ने बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी शुरू कर सकता है। IMD की बुलेटिन के अनुसार मानसून 17 सितंबर से वापसी लौटने लगेगा और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस लौट जाएगा।

15 सितंबर से राजस्थान से लौटेगी मानसून

राजस्थान में जमकर बरसने के बाद 15 सितंबर से मानसून की वापसी का दौर शुरू हो जाएगा। 15 अक्टूबर को कर्नाटक के रास्ते मानसून पूरी तरह से लौट जाएगा। इस साल मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था, जो साल 2009 के बाद सबसे पहली बार आया था। इस सीजन मानसून के दौरान 778.6 मिमी की सामान्य वर्षा के मुकाबले 836.2 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य बरसात के मुकाबले 7 फीसदी ज्यादा है। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य बारिश (538.1 मिमी) के मुकाबले 34 फीसदी अधिक यानी 720.4 फीसदी बारिश हुई।

मध्य भारत में 978.3 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 882 मिमी से 11 प्रतिशत ज्‍यादा है, जबकि दक्षिणी भारत में सामान्य 611 मिमी से 7 प्रतिशत ज्‍यादा हुई है, हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश हुई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 949.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 1192.6 मिमी से 20 प्रतिशत कम है।

दशकों बाद पंजाब में आई बाढ़

अत्यधिक बारिश के चलते पंजाब में दशकों बाढ़ आई। पंजाब के सभी 23 जिले और 1900 से अधिक गांव जलमग्न हो गए। लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई। हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। हिमाचल और उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाएं सामने आईं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू में नदियों ने विकराल रूप धारण कर लिया। इसके चलते कई पुल बह गए।