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ब्लैक ड्रेस प्रोटेस्ट: राहुल गांधी की सांसदी जाने पर संग्राम, विपक्ष के नेता काले कपड़े पहनकर पहुंचे संसद

राहुल गांधी को लोकसभा से अयोग्य ठहराए जाने के विरोध में सोमवार को कांग्रेस सांसदों ने काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे कांग्रेस सांसदों के अलावा, कुछ अन्य विपक्षी नेता भी थे जिन्होंने काले रंग के कपड़े पहनने का विकल्प चुना।

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Opposition leader

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राहुल गांधी को संसद से अयोग्य ठहराने जाने के बाद से ही विपक्षी दल लगातार मोदी सरकार पर हमला बोला रहा है। राहुल की सदस्यता रद्द होने के विरोध में कल यानी रविवार को कांग्रेस ने राजधानी दिल्ली सहित देशभर में सत्याग्रह किया। लोकसभा से राहुल गांधी के निष्कासन के विरोध में सोमवार को कांग्रेस सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। कांग्रेस सांसदों के अलावा, कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने भी काले कपड़े धारण किए। इस बीच, विपक्षी सदस्यों ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा उनके कक्ष में बुलाई गई बैठक में भाग लिया और सदन में एक संयुक्त रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

लोकसभा में स्थगन नोटिस दिया


कांग्रेस सांसदों ने राहुल गांधी की अयोग्यता के खिलाफ लोकसभा में स्थगन नोटिस दिया है और राज्यसभा में विपक्ष के सांसदों ने हिंडनबर्ग मामले में निलंबन नोटिस और राजनीतिक नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का प्रस्ताव दिया है। दरअसल, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को लोकसभा में एक स्थगन नोटिस पेश किया, जिसमें कहा गया यह सदन राहुल गांधी की अयोग्यता पर चर्चा करने के लिए शून्यकाल और दिन के अन्य कार्यों को स्थगित करता है।

अयोग्यता जल्दबाजी और गलत निर्णय


साथ ही नोटिस में कहा गया है कि सदन की सदस्यता से राहुल गांधी की अयोग्यता एक जल्दबाजी और गलत निर्णय था और भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं था। संविधान का अनुच्छेद 102 (1) (ई) कहता है कि एक व्यक्ति को संसद के किसी भी सदन के सदस्य के रूप में चुने जाने और होने के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा यदि वह संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून द्वारा या उसके तहत अयोग्य है।

सदस्यों की अयोग्यता का निर्णय राष्ट्रपति के पास


नोटिस में कहा गया है, अनुच्छेद 103(1) प्रदान करता है कि सदस्यों की अयोग्यता का निर्णय भारत के राष्ट्रपति के पास है। इसके अलावा, अनुच्छेद 103(2) में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्वारा अयोग्यता पर निर्णय भारत के चुनाव आयोग के साथअनिवार्य परामर्श से पहले होना चाहिए। तिवारी ने कहा कि कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन, संविधान के प्रावधानों के विपरीत और संसद सचिवालय की कानूनी क्षमता से परे है। नोटिस में कहा गया है, इन परिस्थितियों में, राहुल गांधी की अयोग्यता से संबंधित इस मामले पर चर्चा करने के लिए सदन को स्थगित करना चाहिए।