
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी। (फोटो- IANS)
India-US Trade Deal: भारत अमेरिका ट्रेड डील के फ्रेमवर्क जारी होने पर सियासी बवाल मच गया है। मोदी सरकार ट्रेड डील के फ्रेमवर्क जारी होने पर अपनी पीठ थपथपा रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने हमला बोल दिया है। कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि अभी जारी किए गए अमेरिका-भारत संयुक्त बयान में डिटेल्स पर कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा गया है। लेकिन जो बातें अब तक सामने आई हैं, उनसे यह साफ़ होता है कि भारत अब रूस से तेल आयात नहीं करेगा। अलग से, अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि यदि भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल खरीदता है, तो 25 प्रतिशत का दंड दोबारा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों की कीमत पर अमेरिकी किसानों की मदद के लिए भारत आयात शुल्कों (import duties) में भारी कटौती करेगा। अमेरिका से भारत का वार्षिक आयात तीन गुना हो जाएगा, जिससे वस्तुओं के व्यापार में हमारा लंबे समय से चला आ रहा सरप्लस समाप्त हो जाएगा। अमेरिका को भारत के आईटी और अन्य सेवाओं के निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। भारत के वस्तु निर्यात को अमेरिका में पहले की तुलना में अधिक शुल्कों (duties) का सामना करना पड़ेगा। इतनी झप्पियों और फोटो-ऑप्स का कोई खास नतीजा नहीं निकला। नमस्ते ट्रंप, हाउडी मोदी पर भारी पड़ गया।
वहीं, इस मामले पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का भी बयान आया है। संजय सिंह ने कहा कि मोदी ने देश से झूठ बोला, करोड़ों किसानों के साथ धोखा किया। अमेरिका के लिए 0% टैक्स पर भारत का कृषि बाज़ार खोल दिया। उनके सस्ते अनाज और फल देश के बाज़ार में बिकेंगे और हमारा किसान बर्बाद हो जाएगा। भारत रूस से सस्ता तेल लेने के बजाय अमेरिका से महंगा तेल लेगा, जिसका खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ेगा और 80,000 करोड़ का भार देश के आम लोगों पर पड़ेगा। EpsteinFiles में मोदी का नाम और अडानी को अमेरिका से मिले समन के कारण मोदी ने देश के हितों को नीलाम कर दिया।
भारत-अमेरिका के बीच हुई ताजा ट्रेड डील पर सपा का बयान भी आया है। सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने कहा कि अमेरिकन कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोले जाने पर वहां खुशियां मनाई जा रही हैं ।अमेरिका की कृषि मंत्री जिसे वहां सचिव कहा जाता है ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बात के लिए बधाई दी है कि उन्होंने अमेरिकी किसानों के उत्पादों के लिए भारत जैसे बड़े बाजार को खोलने में कामयाबी हासिल की ।
अमेरिकी सरकार अपने किसानों को इतनी हैवी सब्सिडी देती है कि अमेरिका का किसान अपने उत्पाद यहां सस्ते से सस्ते दामों पर बेच सकता है । भारतीय किसानों के उत्पाद उनके मुकाबले में टिक ही नहीं पाएंगे और धीरे-धीरे भारतीय किसान बर्बाद हो जाएंगे । यही हाल पशुपालकों का भी होना है । क्योंकि अमेरिका के डेयरी उत्पादों के लिए भी बाजार खोल दिए गए हैं । भारत का बिका हुआ मीडिया और गुलाम अंधभक्त इस संकट का अंदाजा ही नहीं लगा पा रहे हैं ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि दो महान देशों के बीच यह समझौता "हमारी साझेदारी की बढ़ती गहराई, विश्वास और गतिशीलता को दर्शाती है।" उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प को दोनों देशों के मजबूत संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद भी दिया।
पीएम के अनुसार यह भारत के मेहनती किसानों, MSME, स्टार्टअप , मछुआरों और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खोलकर Make In India को मजबूत करेगा। साथ ही इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।
ट्रेड डील में अहम भूमिका निभाने वाले कॉमर्स मिनिस्ट पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता किसानों के हितों की सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल, तंबाकू, सब्जियों और मांस जैसे कृषि व डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित रखा गया है।
Updated on:
07 Feb 2026 12:25 pm
Published on:
07 Feb 2026 12:10 pm
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