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पहलगाम और दिल्ली बम ब्लास्ट का एक ही मास्टरमाइंड, नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

प्रॉक्सी युद्ध पर नई रिपोर्ट: भारत के खिलाफ पाकिस्तान की साजिशों पर दुनिया ने आंखें क्यों मूंदी हैं? नई रिपोर्ट ने बजाई खतरे की घंटी…नीचे पढ़ें पूरी अपडेट।

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 14, 2026

Pakistan proxy war

पहलगाम और दिल्ली ब्लास्ट का एक सीन। फोटो में पीड़िता। (इमेज सोर्स: ANI)

Proxy Warfare Report: भारत को दहलाने वाली पहलगाम और दिल्ली ब्लास्ट की कड़ियां आखिरकार जुड़ती नजर आ रही हैं। एक नई रिपोर्ट ने न सिर्फ दोनों हमलों के एक ही मास्टरमाइंड का खुलासा किया है, बल्कि दुनिया की उस चुप्पी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं जो पाकिस्तान की साजिशों को लगातार ढाल देती रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की अनदेखी ने इस्लामाबाद की हिम्मत इतनी बढ़ा दी है कि वह बेखौफ होकर प्रॉक्सी वॉर को अंजाम दे रहा है। अब विशेषज्ञों का दावा है कि भारत को सिर्फ मिलिट्री स्ट्राइक ही नहीं, बल्कि ऐसे नॉन-काइनेटिक हथियार भी अपनाने होंगे जिनकी कीमत पाकिस्तान को भारी पड़े।

रिपोर्ट: आतंकवादी ग्रुप जैश-ए-मोहम्मद जिम्मेदार

यूरेशिया रिव्यू में पूर्व आर्मी ऑफिसर नीलेश कुंवर ने एक रिपोर्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि यूएन की 1267 प्रतिबंध समिति सिर्फ “कागज का शेर” बनकर रह गई है। उनके मुताबिक यह कमेटी सदस्य देशों से मिलने वाले इनपुट पर रिपोर्ट तो बना देती है, लेकिन खुद कोई जांच नहीं करती और न ही कोई ठोस कदम उठाती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यूएन की 37वीं रिपोर्ट ने पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले और 9 नवंबर 2025 के लाल किले के पास हुए सुसाइड कार ब्लास्ट से जोड़ा है। इसमें जेईएम की महिलाओं वाली आतंकी इकाई जमात-उल-मुमिनात का भी जिक्र किया गया है, जो “ग्लोबल जिहाद” के लिए बनाई गई थी। लेकिन रिपोर्ट यह भी कह देती है कि ये जानकारियां सिर्फ उसी आधार पर दी गई हैं जो भारत ने बताई थीं, यानी यूएन ने इन्हें अपने स्तर पर जांच की पुष्टि नहीं की।

कुंवर ने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल नवंबर में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से एक 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल पकड़ा गया, जिसमें ज्यादातर डॉक्टर शामिल थे।

यह मॉड्यूल भारत में हमलों की तैयारी कर रहा था और इसी मॉड्यूल के एक सदस्य ने 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास सुसाइड कार ब्लास्ट किया था। यह साफ संकेत है कि जेईएम लगातार भारत में आतंकी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

कुंवर के अनुसार, भले ही यह समिति बहुत प्रभावी नहीं है, लेकिन इसकी रिपोर्ट भारत के लिए डिप्लोमैटिक फायदे लेकर आती है। क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि जेईएम खत्म हो चुका है, मगर यूएन की ही रिपोर्ट यह दिखाती है कि यह आतंकी संगठन अब भी पाकिस्तान में सक्रिय है… और भारत के पास इसके ठोस सबूत मौजूद हैं।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 7 मई 2024 को ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के बहावलपुर में जेईएम के मुख्यालय पर एयरस्ट्राइक की थी, जिसके बाद संगठन में काफी अंदरूनी टूट-फूट और असंतोष की खबरें सामने आईं। यह भी कहा गया कि जेईएम चीफ ने खुद माना था कि इस हमले में उसने अपने परिवार के 10 सदस्य खो दिए… यह इस बात का बड़ा सबूत है कि यह संगठन पाकिस्तान में अब भी चल रहा था।