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भारतीय सेना की जासूसी के लिए पाकिस्तान ने किया सोलर-पावर्ड CCTV नेटवर्क का इस्तेमाल, पुलिस ने किया भंडाफोड़

भारतीय सेना की जासूसी के लिए पाकिस्तान ने एक नया तरीका निकाला, लेकिन पुलिस ने इसका भंडाफोड़ कर दिया। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

•

Updated: 21 Apr 2026, 9:32 AM IST

Solar powered CCTV

Solar powered CCTV

पाकिस्तान (Pakistan) से जुड़े जासूसी मॉड्यूल ने सोलर-पावर्ड सीसीटीवी नेटवर्क का इस्तेमाल करके भारतीय सेना (Indian Army) की जासूसी करने का एक नया तरीका अपनाया था। हालांकि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की इस साजिश का भंडाफोड़ कर दिया और इस मॉड्यूल को भी ध्वस्त कर दिया। पुलिस ने इस दौरान 11 लोगों को गिरफ्तार भी किया।

बिना बिजली के भी हर समय जासूसी का प्लान

पाकिस्तानी जासूसी का यह नेटवर्क पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में सैन्य स्थानों के पास एक्टिव था। आईएसआई के हैंडलर्स ने इसे बब्बर खालसा इंटरनेशनल नाम के खालिस्तानी संगठन से जोड़कर चलाया। यह मॉड्यूल पारंपरिक जासूसी की बजाय सोलर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल इसलिए करता था जिससे बिना बिजली के भी हर समय जासूसी की जा सके।

कैसे काम करता था मॉड्यूल?

इस जासूसी मॉड्यूल का संचालन कई चरणों में होता था। सबसे पहले आईएसआई हैंडलर्स सोशल मीडिया के ज़रिए बेरोजगार या आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को फंसाते थे। इसके बाद उन्हें पहले हथियार सप्लाई या ड्रग्स तस्करी जैसे छोटे काम सौंपे जाते थे, फिर धीरे-धीरे सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम सौंपा जाता था। इन सीसीटीवी कैमरों में सोलर पैनल लगे होते थे, जो दूरदराज के इलाकों में भी बिना बिजली कनेक्शन के काम करते थे। फर्जी पहचान से खरीदे गए सिम कार्ड्स कैमरों में डाले जाते थे, जिससे 4G/5G नेटवर्क पर लाइव वीडियो फीड पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को सीधे भेजी जाती थी। कुछ कैमरे चीन के EseeCloud प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, जो रिमोट एक्सेस की सुविधा देते थे।

रणनीतिक जगहों पर लगाए जाते थे कैमरे

ये कैमरे रणनीतिक जगहों पर लगाए जाते थे, जैसे दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन, सोनीपत रेलवे ट्रैक, आर्मी कैंटोनमेंट्स के पास की सड़कें, हाईवे और बॉर्डर इलाके। इनमें सेना के वाहनों, टैंकरों, बटालियनों की आवाजाही और ट्रूप मूवमेंट को रीयल-टाइम में रिकॉर्ड किया जाता था। हैंडलर्स पाकिस्तान में बैठकर इन फीड्स को देखते थे। हैंडलर्स कैमरों की फीड्स को देखकर ट्रूप पैटर्न, वाहनों की संख्या और असामान्य गतिविधियों को नोट करते थे, जिससे आतंकी हमलों के समय इनका फायदा उठाया जा सके। यह नेटवर्क इतना विकसित था कि बिना किसी भौतिक संपर्क के लंबे समय तक चल सकता था।

पुलिस ने की साजिश नाकाम

मॉड्यूल की जांच में पता चला कि यह सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं था। इसमें हथियार तस्करी, रेकी और संभावित आतंकी हमलों की तैयारी भी शामिल थी। दिल्ली पुलिस ने 9 सोलर पावर्ड सीसीटीवी कैमरे, बंदूकें और कारतूस बरामद किए। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया वो दिल्ली, गाज़ियाबाद और पंजाब से थे। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने पूरे देश में सीसीटीवी नेटवर्क की ऑडिट का आदेश दिया है, खासकर विदेशी तकनीक वाले कैमरों की जांच शुरू की गई। भारतीय एजेंसियों और पुलिस की सतर्कता से पाकिस्तान के इस जासूसी मॉड्यूल को समय रहते पकड़ लिया गया, लेकिन भविष्य में ऐसी तकनीकी जासूसी और बढ़ सकती है। इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और और कई स्लीपर सेल्स का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।