
नीट छात्रा गैंगरेप मामला (X)
बिहार की राजधानी पटना में एक नीट छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गैंगरेप की सच्चाई दबाने के लिए छात्रा को गलत इंजेक्शन देकर मार दिया गया। इस घटना के बाद परिजनों का सब्र टूट गया है और उन्होंने पटना पुलिस पर भरोसा न होने की बात कहते हुए CBI जांच की मांग की है। पीड़ित परिवार जहानाबाद जिले का रहने वाला है। परिजनों ने शुक्रवार को पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया।
परिजनों का कहना है कि कंकड़बाग स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने रुपये लेकर गलत मेडिकल रिपोर्ट तैयार की। परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन पहले से ही हॉस्टल संचालकों से मिला हुआ था। इसी कारण पुलिस की शुरुआती जांच में मामले को आत्महत्या बताने की कोशिश की गई।
मृत छात्रा के मामा ने बताया कि छात्रा ने पिछले वर्ष नीट परीक्षा दी थी, लेकिन कुछ अंकों से एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिल पाया। वह बीडीएस में एडमिशन लेने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन इसे लेकर वह किसी भी तरह के अवसाद में नहीं थी। उन्होंने बताया कि 5 जनवरी की रात करीब 9 बजे छात्रा ने अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत की थी और वह पूरी तरह सामान्य थी।
6 जनवरी की शाम करीब 5 बजे, हॉस्टल में रहने वाली एक अन्य छात्रा के पिता ने परिजनों को फोन कर बताया कि उनकी बेटी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जब परिजन पटना पहुंचे तो वे यह देखकर सन्न रह गए कि घटना से जुड़े कई अहम सबूत पहले ही मिटाए जा चुके थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस जगह को गर्ल्स हॉस्टल बताया जा रहा था, वहां भवन मालिक मनीष कुमार रंजन और उसका बेटा भी रहते थे, जो नियमों के खिलाफ है।
सवर्ण सेना के राष्ट्रीय संयोजक भागवत शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हॉस्टल संचालक श्रवण अग्रवाल, उनकी पत्नी नीलम अग्रवाल और भवन मालिक मनीष कुमार रंजन मिलकर अवैध गतिविधियों में शामिल थे। छात्रा उसी का शिकार बनी। उन्होंने दावा किया कि सामूहिक दुष्कर्म के बाद छात्रा की हालत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
भागवत शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद हॉस्टल संचालक ने परिजनों को 10 से 15 लाख रुपये का ऑफर देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। अस्पताल को भी पहले से मैनेज कर रखा गया था। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान जब छात्रा को होश आया तो उसने अपनी मां को अपने साथ हुई दरिंदगी के बारे में बताया। वह आगे कुछ कह पाती, उससे पहले ही अस्पताल कर्मियों ने मां को बाहर निकाल दिया और डॉक्टर ने छात्रा को गलत इंजेक्शन लगा दिया, जिसके बाद वह कोमा में चली गई।
इस मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दरिंदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद बिहार पुलिस ने केस की जांच के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन कर दिया है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि SIT की कमान पटना पूर्वी सिटी एसपी को सौंपी गई है।
गौरतलब है कि जहानाबाद की रहने वाली यह छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही थी। 6 जनवरी को वह अपने कमरे में बेहोश मिली, जिसके बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीते रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अब तक हॉस्टल मालिक को सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने साक्ष्य छिपाने के लिए छात्रा के कमरे की सफाई कर दी थी।
Published on:
17 Jan 2026 11:41 am
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