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जम्मू-कश्मीर में एक साल से अधिक समय से रह रहे लोग मतदाता के रूप में जुड़वा सकेंगे नाम, आदेश जारी

जम्मू में एक साल से अधिक समय से रह रहे लोग मतदाता के रूप में अब नाम जुड़वा सकते हैं, जिसको लेकर जम्मू जिला चुनाव अधिकारी अवनी लवासा ने आदेश जारी कर दिया है। अवनी लवासा ने आदेश में बताया है कि इसके लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट स्वीकार किए जाएंगे।

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Abhishek Kumar Tripathi

Oct 12, 2022

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People residing in Jammu for over a year can register as voters, Details

जम्मू-कश्मीर में इसी साल नवंबर-दिसंबर में चुनाव कराया जा सकते हैं, जिसको लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच जम्मू जिला चुनाव अधिकारी अवनी लवासा ने पिछले एक साल से जम्मू में रह रहे लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए आदेश जारी किया है। इसके लिए सबसे पहले तहसीलदारों और राजस्व अधिकारियों पिछले एक साल से जम्मू में रह रहे लोगों को निवास का प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत उनका नाम मतदाता सूची में जुड़ सकेगा।

दरअसल पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी हिरदेश कुमार ने कहा था कि मतदाता सूची में विशेष संशोधन के दौरान लगभग 20 लाख से 25 लाख नए मतदाताओं के जुड़ने की संभावना है। इसके बाद से एक विवाद खड़ा हो गया था कि जिसके पास कुछ डॉक्यूमेंट नहीं है वो अपना नाम कैसे जुड़वा सकता है।

इन डॉक्यूमेंट्स के जरिए मतदाता सूची में जम्मू-कश्मीर के निवासी जुड़वा सकेंगे नाम
जम्मू जिला चुनाव अधिकारी ने आदेश जारी करते हुए बताया है कि पिछले एक साल से जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोग इन डॉक्यूमेंट्स के जरिए अपना नाम जुड़वा सकेंगे।

- कम से कम एक साल से पानी, बिजली या गैस कनेक्शन
-आधार कार्ड
- किसान बहियों सहित राजस्व विभाग का भू-स्वामित्व अभिलेख
- किरायेदारों के मामले में पंजीकृत किराया नामा
-अपने घर के मामले में पंजीकृत बिक्री विलेख
- किसी राष्ट्रीय बैंक, डाकघर की पासबुक
- भारतीय पासपोर्ट

पहली बार वोट डाल डालेंगे पाकिस्तानी शरणार्थी
इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी शरणार्थी पहली बार वोट डाल पाएंगे। दरअसल शरणार्थियों को जम्मू-कश्मीर का नागरिक नहीं माना जाता था। इसके कारण न ही नौकरी, न ही जमीन खरीदने और न ही मतदान करने का अधिकार था, लेकिन धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को मिले विशेष अधिकार खत्म हो गए हैं। इसके बाद मतदाता सूची में पाकिस्तानी शरणार्थी के नाम जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है।

यह भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर में पहली बार वोट डालेंगे पाकिस्तानी शरणार्थी, 5400 परिवारों को 68 साल बाद मिलेगा जमीन का हक, दी गई 5.5 लाख रुपए की आर्थिक मदद