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राज्यसभा में सांसदों से PM मोदी ने की अपील, बोले- महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पास करें

PM Modi in Rajyasabha: राज्यसभा में अपने भाषण की शुरुआत में PM मोदी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री हों, गोविंद वल्लभ पंत हो लालकृष्ण आडवाणी हो, श्यामा प्रसाद मुखर्जी हों या अरुण जेटली हो, ऐसे कई लोगों ने इस सदन को सुशोभित किया हैं और देश का मार्गदर्शन किया हैं।

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 PM Modi appealed Rajyasabha MP pass women reservation bill unanimously


संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन आज यानी 19 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि नया संसद भवन केवल एक नई बिल्डिंग बस नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत का प्रतीक भी है। यह सदन देश के 140 करोड़ नागरिकों में एक नई ऊर्जा, आशा और विश्वास पैदा करना वाला है।

आज जब हम देश का अमृत महोत्सव मना रहे हैं उस वक्त हम विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन जब हम इसी सदन में देश का 100 वीं वर्षगांठ मना रहे होंगे उस वक्त हम विकसित भारत के साथ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके होेंगे।

पूर्व राष्ट्रपति से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री तक का जिक्र

राज्यसभा में अपने भाषण की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री हों, गोविंद बल्लभ पंत हो लालकृष्ण आडवाणी हो, श्यामा प्रसाद मुखर्जी हों या अरुण जेटली हो, ऐसे कई लोग इस सदन को सुशोभित किया है और देश का मार्गदर्शन किया है।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने राज्यसभा के महत्व पर कहा था- राज्यसभा से देश की जनता की अनेक ऊंची अपेक्षाएं हैं, सर्वोत्तम अपेक्षाएं हैं। इसलिए माननीय सदस्यों के बीच गंभीर विषयों की चर्चा करना और उन्हें सुनना एक बड़ा सुखद अवसर होता है।


मल्लिकार्जुन खड़गे ने घेरा

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा कि PM मोदी का आज ज्यादा भाषण हो गया है। पहले पुराने संसद भवन के सेंट्रल हाल में, फिर लोकसभा में और अब राज्यसभा में उन्होंने अपना भाषण दिया। खरगे ने इसके बाद महिला आरक्षण बिल पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वे हमें श्रेय नहीं देते हैं।

लेकिन मैं उनके ध्यान में लाना चाहता हूं कि महिला आरक्षण विधेयक 2010 में पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन यह रुक गया था। उनके इसी बयान के बाद सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद सभापति जगदीप धनखड़ को हस्तक्षेप करना पड़ा।

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