
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो- ANI)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा के लिए शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। व्हाइट हाउस की तरफ से पीएम मोदी को पत्र लिखा गया है और इस पत्र को भारत में अमेरिकी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है।
ट्रंप ने पत्र में लिखा, 'आपको भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और साथ ही वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक नई और साहसिक पहल में मेरे साथ जुड़ने का हार्दिक आमंत्रण देना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है।' ट्रंप ने आगे कहा कि 29 सितंबर 2025 को मैंने गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा की थी। यह 20-सूत्रीय रोडमैप है, जिसे अरब दुनिया, इजराइल और यूरोप सहित कई देशों के प्रमुख नेताओं ने तुरंत स्वीकार किया। इस योजना को आगे बढ़ाते हुए 17 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भारी बहुमत से प्रस्ताव 2803 पारित किया, जिसमें इस दृष्टि का स्वागत और समर्थन किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब समय आ गया है कि इन सपनों को हकीकत में बदला जाए। इस योजना का केंद्र है “शांति बोर्ड”, जो अब तक का सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण बोर्ड होगा। इसे एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और अस्थायी शासकीय व्यवस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हमारा यह प्रयास उन प्रतिष्ठित देशों को एक साथ लाएगा, जो स्थायी शांति स्थापित करने की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं। यह सम्मान उन्हीं को मिलेगा जो उदाहरण बनकर नेतृत्व करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित व समृद्ध भविष्य में निवेश करने को तैयार हैं। हम जल्द ही अपने सम्मानित और प्रतिबद्ध साझेदारों की बैठक बुलाएंगे, जिनमें से अधिकांश विश्व के प्रतिष्ठित नेता हैं।
इस पत्र को शेयर करते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने लिखा है कि मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा में स्थायी शांति लाने वाले शांति बोर्ड में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि गाजा पीस डील के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को न्योता दिया है। वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के नेताओं को भी बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
विदेशी मीडिया में छपी रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन द्वारा लगभग 60 देशों को भेजे गए एक ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि अगर बोर्ड के सदस्य अपनी मेंबरशिप तीन साल से ज्यादा समय तक रखना चाहते हैं, तो उन्हें 1 बिलियन डॉलर कैश में देने होंगे। इस चार्टर के हवाले से कहा गया है कि बोर्ड ऑफ पीस एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है। जो स्थिरता को बढ़ावा देना, भरोसेमंद और कानून शासन को बहाल करने में इच्छुक है।
ट्रंप ने ऐलान किया था कि ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर बोर्ड के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों में से एक होंगे। ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और मिडिल ईस्ट के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वर्ल्ड बैंक ग्रुप के प्रेसिडेंट अजय बंगा भी इस बोर्ड में शामिल होंगे।
Published on:
19 Jan 2026 08:04 am
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