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पीएम मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात, जानें दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने भी इस बातचीत को काफी अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ उनके देश के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 31, 2026

PM Modi, Netherlands Prime Minister Rob Jetten

PM Modi, Netherlands Prime Minister Rob Jetten

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से फोन पर बातचीत की। यह बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें दोनों देशों के भविष्य के सहयोग को लेकर गंभीर चर्चा हुई। खास बात यह रही कि बातचीत का फोकस उन क्षेत्रों पर रहा जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीक को दिशा देंगे। दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, जल प्रबंधन और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बात की। इन सेक्टरों को लेकर भारत और नीदरलैंड के बीच साझेदारी पहले से ही मौजूद है, लेकिन अब इसे और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। खासकर सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने की बात सामने आई।

क्या हुई बातचीत


प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर भी इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी संभावनाएं हैं और दोनों देश मिलकर कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की और वहां शांति बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया।

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?


उधर, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने भी इस बातचीत को काफी अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ उनके देश के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस साल की शुरुआत में भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता हुआ था, जिससे आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

जानें डिटेल्स


जेटेन ने साफ कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए देशों के बीच सहयोग पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी को नीदरलैंड में आमंत्रित करना चाहते हैं, ताकि दोनों देश इन मुद्दों पर आमने-सामने बैठकर आगे की रणनीति तय कर सकें। इस बातचीत को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है। चाहे वह ऊर्जा संकट हो, तकनीकी प्रतिस्पर्धा या फिर क्षेत्रीय अस्थिरता। ऐसे में भारत और नीदरलैंड का साथ आना आने वाले समय में कई नए अवसर पैदा कर सकता है।