
PM Modi Praises Mohan Bhagwat
PM Modi Praises Mohan Bhagwat’s Address: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव का संदेश अब राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की सराहना करते हुए राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकजुटता और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण से जुड़े विचारों को महत्वपूर्ण बताया। पीएम मोदी के संदेश में सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को विशेष स्थान मिला। साथ ही, उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा को समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने आधिकारिक X अकाउंट पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के मौके पर सभी स्वयंसेवकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उन महान विभूतियों को भी नमन किया जिन्होंने सालों तक अथक मेहनत और सेवाभाव से संघ को मजबूत बनाया। मोदी ने लिखा कि आरएसएस ने सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सद्भाव का गौरवशाली शताब्दी वर्ष पूरा कर लिया है। अनगिनत स्वयंसेवकों ने कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र-प्रथम की भावना से समाज के उत्थान के लिए काम किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यही भावना आने वाले दिनों में देश को और सशक्त व सुदृढ़ बनाएगी।
यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरएसएस की नींव 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के पवित्र दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने रखी थी। उस समय मुट्ठी भर युवाओं से शुरू हुआ यह संगठन आज देश के कोने-कोने में सक्रिय है। डॉ. हेडगेवार का उद्देश्य चरित्र निर्माण के जरिए समाज को एकजुट करना और राष्ट्र को मजबूत बनाना था। बाद के वर्षों में गुरु गोलवलकर जैसे नेताओं ने इस विचारधारा को और विस्तार दिया। आज सरसंघचालक मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ हजारों शाखाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में लगातार काम कर रहा है।यह खबर अभी अपडेट हो रही है
मोदी ने मोहन भागवत के ‘पंच परिवर्तन’ संबंधी विचारों को भी रेखांकित किया। इस अवधारणा को सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा से जोड़कर देखा जाता है। संघ के विचार-विमर्श में सामान्यतः सामाजिक समरसता, परिवारों में मूल्यों का संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, स्वदेशी के प्रति प्रोत्साहन और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों को महत्व दिया जाता है।
इन मुद्दों का दायरा केवल संगठनों तक सीमित नहीं है। पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना, समाज में भेदभाव कम करना और परिवारों में संवाद बढ़ाना जैसे प्रयास आम नागरिकों के दैनिक जीवन से भी जुड़े हैं। हालांकि, इन विचारों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें व्यवहार में किस तरह अपनाया जाता है।
प्रधानमंत्री के संदेश में इन्हीं प्रयासों की गूंज सुनाई देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवकों की निष्ठा ने न केवल संगठन को सौ साल का सफर तय करने में मदद की बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को भी गति दी।
Updated on:
20 Oct 2026 11:15 am
Published on:
20 Oct 2026 10:43 am
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