
प्रशांत किशोर(फोटो-IANS)
आठ साल की राजनीतिक पारी खेलने के बाद प्रशांत किशोर आखिरकार विधायक बन गए हैं। उन्होंने बांकीपुर विधान सभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के नीरज कुमार को हरा कर अपने लिए विधान सभा का दरवाजा खोल लिया है। तीन अगस्त को 32 राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर को 19324 वोट से जीत मिली। उन्हें 64151 वोट मिले। भाजपा के नीरज कुमार 44827 वोट पाकर दूसरे और राजद की रेखा कुमारी 14273 मतों के साथ तीसरे नंबर पर रहीं।
| नाम (Candidate Name) | पार्टी (Party Name) | कुल वोट (Votes) |
| प्रशांत किशोर | जन सुराज पार्टी | 64,151 |
| नीरज कुमार | भारतीय जनता पार्टी | 44,827 |
| रेखा कुमारी | राष्ट्रीय जनता दल | 14,273 |
| मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव | प्रगतिशील जनता पार्टी | 973 |
| तनवीर आलम | राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी | 864 |
| प्रदीप कुमार | भारतीय आम आवाम पार्टी | 781 |
| बैजनाथ प्रसाद | भारतीय जवान किसान पार्टी | 383 |
| अनिल दास | निर्दलीय (Independent) | 311 |
| सिकंदर कुमार | निर्दलीय (Independent) | 264 |
| जितेन्द्र दुबे | अखिल भारतीय जन संघ | 257 |
| रामबाबू प्रसाद | राष्ट्रीय गरीब दल | 240 |
| मृत्युंजय कुमार | राष्ट्रीय समाजहित दल | 233 |
| सूरज कुमार यादव | पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) | 231 |
| प्रेम शंकर प्रसाद | प्रौटिस्ट ब्लॉक, इंडिया | 225 |
| मनीषा शर्मा | राष्ट्रीय अपना दल | 207 |
किशोर 2018 में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में गए थे। नीतीश ने उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष भी बनाया था, लेकिन दोनों की निभी नहीं और कुछ ही दिनों बाद किशोर ने अपने रास्ते अलग कर लिए।
2022 में किशोर के कांग्रेस में जाने की भी खूब अटकलें लगी थीं। हालांकि, अंततः ऐसा कुछ हुआ नहीं। इससे पहले ऐसी चर्चा भी गरम हुई थी की किशोर ने कांग्रेस की चुनावी जीत के लिए प्लान बनाया था और सलाह दी थी कि कांग्रेस का अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का कोई नेता बने। उनका यह आइडिया लीक हो गया था।
कांग्रेस में जाने की अटकलें ठंडी पड़ने के साथ प्रशांत किशोर अपनी दूसरी योजना पर काम करने लगे। उन्होंने बिहार में राजनीतिक जमीन तलाशने की दिशा में काम शुरू किया। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए उन्होंने 2024 में गांधी जयंती (2 अक्तूबर) के मौके पर अपनी पार्टी बनाई और 2025 का विधान सभा चुनाव लड़े। इसमें नाकाम रहे तो कहा कि कोशिश जारी रहेगी। इसी बीच बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्य सभा जाने के बाद बांकीपुर विधान सभा सीट खाली हुई तो किशोर ने वहां से चुनाव लड़ने का फैसला किया। अब वह विधायक हैं।
खुद राजनीति में उतरने से पहले प्रशांत किशोर पार्टियों को चुनाव लड़ने में मदद करते थे और बदले में मोटा पैसा लेते थे। उन्होंने 2012 में गुजरात विधान सभा चुनाव में भाजपा/नरेंद्र मोदी के लिए यह किया था। इसके बाद 2014 में भी किया जब मोदी पहली बार भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने और जीते। 2022 में गोवा विधान सभा चुनाव के लिए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की मदद की। इसके अलावा भी कई राज्यों में अलग-अलग पार्टियों का चुनावी कैम्पेन मैनेज किया। इसके लिए उन्होंने I-PAC नाम की संस्था बना रखी थी।
बिहार में सक्रिय होने के बाद किशोर ने ऐलान किया कि अब वह चुनावी रणनीतिकार का काम नहीं करेंगे। 2025 के बिहार विधान सभा चुनाव से पहले उन्होंने जन सुराज पार्टी बनाई, लेकिन चुनाव में उनकी पार्टी बुरी तरह नाकाम रही। अब बांकीपुर में उन्हें कामयाबी मिली है तो यह बिहार में उनकी राजनीति के लिहाज से बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' है।
किशोर बिहार में जो 'राजनीतिक विकल्प' खड़ा करने की बात करते रहे हैं, उसे वह अब नई धार दे सकते हैं। विधान सभा चुनाव में उन्हें वोट नहीं देकर जनता ने एक तरह से विकल्प का उनका नारा खारिज कर दिया था। इससे उनका जो मनोबल नीचे गिरा था, किशोर की जीत से वह ऊपर उठ सकता है। इसका फायदा उठा कर किशोर बिहार में एक नया राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का अभियान और तेज कर सकते हैं। बीजेपी, जदयू और राजद के लिए यह नई चुनौती खड़ी कर सकता है। बिहार ने पिछले कई दशकों में इस तरह से किसी नई व चर्चित पार्टी का जन्म होते नहीं देखा है, जैसे जन सुराज का हुआ है। यह किसी पार्टी से टूट कर या नाराज नेता द्वारा खड़ा किया गया दल नहीं है।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत इस मायने में भी खास है कि उन्होंने बीजेपी को हराया है। उस बीजेपी को जिसे वहां से लालू भी नहीं हरा पाए। 1995 से लगातार बांकीपुर (पहले पटना पश्चिम) में बीजेपी ही काबिज रही है। तब नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भाजपा के विधायक बने थे। तब से जीवन पर्यंत वह विधायक बने रहे। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे नितिन नवीन वहां से भाजपा के टिकट पर विधायक बनते रहे। नवीन पहली बार 2006 में विधायक बने थे। बांकीपुर सीट 2008 में बनी थी।
| वर्ष (Year) | नाम (Name) | दल / पार्टी (Party) |
| 1957 | रामशरण साव | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1962 | कृष्ण बल्लभ सहाय | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1967 | महामाया प्रसाद सिन्हा | जन क्रांति दल |
| 1969 | ए. के. सेन | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया |
| 1972 | सुनील मुखर्जी | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया |
| 1977 | ठाकुर प्रसाद | जनता पार्टी |
| 1980 | रंजीत सिन्हा | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1985 | रामा नंद यादव | निर्दलीय (Independent) |
| 1990 | रामा नंद यादव | निर्दलीय (Independent) |
| 1995 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2000 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2006 से | नितिन नवीन | भारतीय जनता पार्टी |
Updated on:
03 Aug 2026 07:07 pm
Published on:
03 Aug 2026 05:41 pm
