14 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लोकसभा सीटों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव, संसद में 16 अप्रैल को बिल पेश, सीटें 850 तक बढ़ाने की तैयारी

महिला आरक्षण बिल को लागू करने के लिए सरकार लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव ला रही है। 2011 की जनगणना के आधार पर महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Ankit Sai

Apr 14, 2026

लोकसभा (फोटोःIANS)

Women's Reservation Bill: देश की राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। लंबे समय से चर्चा में रहा महिला आरक्षण मुद्दा अब लागू होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में 16 अप्रैल को संसद में महिला आरक्षण बिल पेश किए जाने की तैयारी है, जिसमें लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। सरकार इस योजना के तहत एक संविधान संशोधन बिल, परिसीमन कानून से जुड़ा बिल और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक सक्षम विधेयक पेश करने जा रही है। इसका उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द लागू करना है, ताकि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सके।

33% महिला आरक्षण का प्रस्ताव

प्रस्तावित बिल के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक किया जा सकता है। इसमें से 815 सीटें राज्यों का प्रतिनिधित्व करेंगी, जबकि 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित होंगी। यह बदलाव संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन के जरिए किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को लागू करना है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन

बिल में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि सीटों के परिसीमन के लिए 2027 की जनगणना का इंतजार नहीं किया जाएगा। इसके बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर नई सीटों का निर्धारण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अगर अगली जनगणना का इंतजार किया गया, तो महिला आरक्षण लागू होने में काफी देरी हो सकती है। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि महिलाओं को जल्द प्रतिनिधित्व मिल सके।

राजनीतिक महत्व और आगे की राह

यह बिल केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू कश्मीर तथा पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। 16 अप्रैल को संसद का सत्र फिर से शुरू होगा, जहां इन प्रस्तावों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनाना भी एक बड़ी चुनौती होगी।