बीजेपी मुख्यालय में औपचारिक स्वागत के बावजूद, इन सांसदों की आधिकारिक ज्वाइनिंग अभी रुकी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया है। राज्यसभा सदस्य होने के नाते, ये सांसद सीधे किसी दूसरी पार्टी की सदस्यता नहीं ले सकते। दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत, उन्हें पहले राज्यसभा के सभापति के समक्ष अपना पक्ष रखना होता है। जब तक सभापति इस विलय को विधिवत स्वीकार नहीं कर लेते और रिकॉर्ड में बदलाव नहीं होता, तब तक ये सांसद तकनीकी रूप से बीजेपी का हिस्सा नहीं माने जाएंगे।