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वर्तमान में जीना ही है ध्यानः गुलाब कोठारी

इटली में ओकी-दो योगा कैम्प में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक ने अपने वक्तव्य रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जीना ही ध्यान है। उन्होंने कहा कि विगत लौटकर नहीं आता है। भविष्य पर हमारा अधिकार नहीं है।

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Gulab Kothari

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी

पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी ने कहा है कि वर्तमान में जीना ही ध्यान है। विगत लौट कर नहीं आता। भविष्य पर हमारा अधिकार नहीं। वर्तमान में जीना ही श्रेयस्कर है। जीवन दुविधाओं से भरा होता है। हम चारों ओर से कई तरह की स्थितियों से घिरे रहते हैं। इससे कई तरह की इच्छाएं पैदा होती है, पूर्व जन्म की भी कई इच्छाएं होती है। इन्हीं इच्छाओं के कारण हम कर्म करने को प्रेरित होते हैं। परिस्थितियों के अनुसार हम विवेक बुद्धि से इच्छाओं को बदल सकते हैं।

इटली में दो दिवसीय शिविर को किया संबोधित

कोठारी इटली के पेजारी में 'ओकी-दो योगा इंटरनेशनल कैम्प के दूसरे दिन शिविरार्थियों को संबोधित कर रहे थे। शिविर में जापान और इटली के सदस्य भाग ले रहे हैं। कोठारी ने कहा कि हमारे सत्-रज-तम गुणों वाले स्वभाव से भी इच्छाएं प्रभावित होती है। उसी के अनुरूप कर्म भी सतोगुणी-तमोगुणी होते हैं और उन्हीं के अनुरूप फल भी होते हैं।

युवाओं में जीवन उद्देश्य की कमी

उनका कहना था कि जीवन में लक्ष्य बना कर उसकी तरफ चलने से उ‌द्देश्य की प्राप्ति अवश्य होती है। आज युवाओं में दिक्कत इस बात की है कि जीवन में उद्देश्य नहीं है। ओकी दो मिक्कियो योगा यूनिवर्सिटी के मार्गदर्शक जापानी आचार्य यूजी वाहिरी ने कहा कि जापानी भाषा के उच्चारण का आधार संस्कृत है। सैकड़ों वर्षों से जापान की संस्कृति पर भारत का प्रभाव रहा है। वहां एक पहाड़ का नाम ही 'योगा माउंटेन' है। योग जीवन के हर क्षेत्र में गहरे रूप में जुड़ा है। यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष लोरेना फुमानी, शिविर प्रमुख नाओमित्सु, प्रो. मोरिचो तथा अलसान्द्रों आदि ने कोठारी का भावभीना स्वागत किया।