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राज्यसभा में CAPF बिल पास, अब CRPF-BSF-CISF के DG पद पर दिखेंगे सिर्फ IPS अफसर, पढ़ें और क्या-क्या दिखेगा बदलाव?

राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026 ध्वनिमत से पास हो गया। इस कानून से देश के पांच बड़े अर्धसैनिक बलों की पूरी कार्यप्रणाली बदल जाएगी।

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भारत

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Mukul Kumar

Apr 01, 2026

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राज्यसभा। फोटो- IANS

राज्यसभा में बुधवार को एक ऐसा कानून पास हुआ है, जो देश के पांच बड़े अर्धसैनिक बलों की पूरी कार्यप्रणाली बदल देगा। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल यानी CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026) को राज्यसभा ने ध्वनिमत से पास कर दिया। लेकिन इससे पहले सदन में इस बिल को लेकर विपक्ष का भारी हंगामा भी देखने को मिला।

आखिर यह बिल है क्या और इससे किसे फर्क पड़ेगा

CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB यानी देश के पांचों बड़े अर्धसैनिक बल अब एक ही कानून के दायरे में आएंगे। अभी तक हर बल के लिए अलग अलग नियम थे, भर्ती के भी, प्रमोशन के भी और सेवा शर्तों के भी। यह बिल इन सबको एक छत के नीचे लाता है।

फिलहाल जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में है वो यह है कि अब इन बलों की सबसे ऊपरी कुर्सियों पर आईपीएस अफसर बैठेंगे। बिल के मुताबिक, Inspector General यानी IG के 50 फीसदी पद, Additional DG के कम से कम 67 फीसदी पद और Special DG तथा DG के सौ फीसदी पद IPS अफसरों के लिए रखे जाएंगे।

CAPF के अपने अफसरों का क्या होगा?

तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने सदन में सबसे पहले यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक आईपीएस अफसर की जिंदगी और एक CAPF अफसर की जिंदगी में जमीन आसमान का फर्क है। बराबर के पद पर होने के बावजूद CAPF अफसर को कहीं ज्यादा मुश्किल हालात में काम करना पड़ता है।

उधर, शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बिल CAPF बनाम IPS की लड़ाई बना दिया गया है जो नहीं होना चाहिए था। उनका कहना था कि इससे CAPF के अफसरों में निराशा का माहौल बनेगा और जो सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में आदेश दिया था कि IPS की तैनाती धीरे धीरे कम की जाए, यह बिल उसके भी खिलाफ जाता है।

विपक्ष ने जमकर किया विरोध

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत पूरे विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजा जाए ताकि ठीक से जांच हो सके। उनका कहना था कि जिन लोगों पर इस कानून का सीधा असर पड़ेगा यानी CAPF के जवान और अफसर, उनसे कोई बात ही नहीं की गई।

जब सरकार ने यह मांग नहीं मानी तो विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। वहीं, इस पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को असल बहस में कोई दिलचस्पी नहीं है और वो संसदीय परंपराओं का सम्मान नहीं करता।

सरकार का तर्क, जवानों की भलाई के लिए आया है यह कानून

गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने यह बिल 25 मार्च को राज्यसभा में पेश किया था। सरकार का कहना है कि इस कानून से CAPF अफसरों की तरक्की में जो रुकावटें थीं वो दूर होंगी। तय समय सीमा में पोस्टिंग होगी, शिकायतों के निपटारे का तरीका साफ होगा और पूरे सिस्टम में एकरूपता आएगी।

BJP सांसद अजीत गोपछड़े ने कहा कि पहले जवान सिस्टम से लड़ते थे, अब सिस्टम जवानों के लिए लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो काम पिछली सरकारें नहीं कर पाईं वो मोदी सरकार ने किया।

बिल में एक खास प्रावधान यह भी है कि अगर इस कानून और किसी पुराने कानून या अदालती आदेश में टकराव हो तो इस कानून को ही मान्यता मिलेगी। यही वो बात है जिस पर विपक्ष को सबसे ज्यादा आपत्ति है।