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क्या घटेंगी भारत और चीन की दूरियां? BRICS शिखर सम्मेलन से पहले चीनी वाणिज्य दूत किन जिए का बड़ा बयान

India China relations 2026: BRICS शिखर सम्मेलन से पहले चीन के वाणिज्य दूत किन जिए ने भारत-चीन संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। जानें क्या दोनों देशों के रिश्तों में नरमी आएगी?

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भारत

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Rahul Yadav

Apr 01, 2026

India China Relations 2026

India China Relations 2026 (Image: Gemini)

India China Relations 2026: भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर एक बार फिर सकारात्मक संकेत देखने को मिल रहे हैं। मुंबई में चीन के वाणिज्य दूत किन जिए (Qin Jie) ने कहा है कि दोनों देशों के रिश्ते सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और आने वाले समय में इनमें और सुधार की उम्मीद है।

सही दिशा में बढ़ रहे हैं संबंध…

किन जिए ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के नेताओं की दो बार मुलाकात हो चुकी है, जिससे रिश्तों को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा, ''भारत-चीन संबंध सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और भविष्य को लेकर हम आशावादी हैं।''

BRICS शिखर सम्मेलन से बढ़ेंगी उम्मीदें

किन जिए ने इस साल भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को भी अहम बताया है। उनके मुताबिक, यह मंच दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और संबंधों को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस साल BRICS शिखर सम्मेलन भारत में होगा, जबकि अगले साल चीन इसकी मेजबानी करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को नई गति मिलेगी।

चीन के विदेश मंत्री का भी सहयोग पर जोर

हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी भारत और चीन के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों को BRICS की अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। वांग यी ने यह भी कहा कि भारत और चीन मिलकर ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए नई उम्मीद बन सकते हैं और वैश्विक मंच पर स्थिरता ला सकते हैं।

वैश्विक तनाव के बीच रिश्तों पर नजर

यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में, तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत और चीन जैसे बड़े देशों के रिश्तों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश सहयोग की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इसका सकारात्मक असर क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है।