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सयानी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर युसूफ पठान तक? TMC के 19 बागी सांसदों की लिस्ट आई सामने

TMC Baagi Saansad List: ममता बनर्जी की पाटी टीएमसी के बागी सांसदों की लिस्ट सामने आ गई है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को हस्ताक्षर करके एक पत्र सौंपा है।

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TMC rebel MPs

टीएमसी के बागी सांसद

TMC Rebel MPs List: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुकी है। तृणमूल कांग्रेस को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कुल 29 लोकसभा सांसदों में से 19 (कुछ रिपोर्टों के अनुसार 20) असंतुष्ट सांसदों ने एकजुट होकर ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत कर दी है। इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इसके साथ ही बागी गुट ने केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को अपना समर्थन देने का बड़ा ऐलान कर दिया है।

वरिष्ठ नेताओं ने संभाली बगावत की कमान

राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, पार्टी की इस ऐतिहासिक टूट की कमान वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय जैसे कद्दावर चेहरे संभाल रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजने से ठीक पहले इन बागी नेताओं ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के कद्दावर भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी के साथ एक गुप्त बैठक भी की थी। इस बगावत के बाद संसद में दलीय स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।

ममता खेमे ने दावों को किया खारिज

संसदीय दल में मची इस भारी उथल-पुथल के बीच ममता बनर्जी के प्रति वफादार खेमे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ममता समर्थित गुट का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और कल्याण बनर्जी ही लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक बने रहेंगे। हालांकि, विरोधी खेमे का दावा है कि उनके पास दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन हासिल है।

TMC सांसद शताब्दी रॉय ने कहा है कि हमने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है और हमारे खेमे में शामिल होने वाले सांसदों की संख्या बढ़ रही है।

विधानसभा के बाद अब लोकसभा में 'खेला'

यह घटनाक्रम इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ ही दिनों पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के करीब 58 विधायकों ने पार्टी हाईकमान के फैसले को चुनौती देते हुए अपनी ही पार्टी के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। विधानसभा में मची रार के बाद अब लोकसभा में सांसदों के इस कदम ने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी भूचाल ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के लिए यह अब तक का सबसे कठिन दौर है, जो बंगाल की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है।

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