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नक्सलवाद की भेंट चढ़ गए दादा, आज तक नहीं मिला शव: संसद में छलका बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का दर्द

Nishikant Dubey on Naxalism: नक्सलवाद पर संसद में चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके दादा नक्सल हिंसा में मारे गए और 35 साल बाद भी उनका शव नहीं मिला... पढ़ें पूरी खबर।

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भारत

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Rahul Yadav

Mar 31, 2026

Nishikant Dubey on Naxalism

Nishikant Dubey on Naxalism (Image: Sansad TV)

Nishikant Dubey on Naxalism: नक्सलवाद पर संसद में चल रही चर्चा के बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद भावुक अनुभव साझा किया, जिसने सदन का माहौल गंभीर कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके दादा नक्सलवाद की भेंट चढ़ गए थे और 35 साल बाद भी उनका शव तक नहीं मिल पाया है।

श्राद्ध तक नहीं कर पाया

निशिकांत दुबे ने कहा कि वह ऐसे परिवार से आते हैं, जिसने नक्सल हिंसा को बहुत करीब से झेला है। उन्होंने बताया कि उनके दादा की नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी, लेकिन आज तक उनका शव नहीं मिला।

उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं पिछले 35 साल से अपने दादा को ढूंढ रहा हूं, लेकिन आज तक उनकी लाश नहीं मिली। मैं उनका श्राद्ध तक नहीं कर पाया।”

झारखंड में नक्सलवाद का जिक्र

सांसद दुबे ने अपने संबोधन में झारखंड में नक्सलवाद की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह उस राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां लंबे समय तक नक्सलवाद का गहरा प्रभाव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के कई जिले वर्षों तक इस समस्या से प्रभावित रहे और कई परिवारों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

बाबूलाल मरांडी के बेटे का जिक्र

निशिकांत दुबे ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मरांडी के बेटे की शादी के कुछ ही समय बाद नक्सलियों ने उनकी हत्या कर दी थी। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने नक्सलवाद की गंभीरता और उसके सामाजिक प्रभाव को सामने रखा।

नक्सलवाद पर सरकार का रुख

इससे एक दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि देश से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।

संसद में निशिकांत दुबे की यह आपबीती नक्सलवाद के उस मानवीय पहलू को सामने लाती है, जिसे आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता। यह घटना बताती है कि नक्सल हिंसा ने केवल सुरक्षा व्यवस्था को ही नहीं, बल्कि अनगिनत परिवारों के जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया है।