
Artificial Intelligence(Image-Freepik)
AI Job Losses: भारत के सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी ओरेकल ने भारत में अपने लगभग 12,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इस व्यापक छंटनी के पीछे मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक सुस्ती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण जाने वाली नौकरियां हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओरेकल प्रबंधन ने मंगलवार सुबह 6 बजे कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा था, "आज आपका आखिरी वर्किंग डे है।" कंपनी ने इसे संगठनात्मक बदलाव का नाम दिया है और यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। वैश्विक स्तर पर ओरेकल करीब 30,000 कर्मचारियों की छंटनी कर रही है, और ऐसी आशंका है कि आने वाले कुछ ही हफ्तों में भारत में छंटनी का दूसरा दौर भी देखने को मिल सकता है।
भारत का आईटी सेक्टर, जिसने पिछले दो दशकों में बेहतरीन विकास देखा है, अब एक ठहराव के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2005 से लेकर 2020 तक आईटी सेक्टर की वृद्धि दर लगभग 15 प्रतिशत सालाना थी, जो अब गिरकर 5 से 6 प्रतिशत के बीच सिमट गई है। नीति आयोग की साल 2025 की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2031 तक ऑटोमेशन और एआई के कारण आईटी और कॉल सेंटर की करीब 20 प्रतिशत नौकरियों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के विशेषज्ञ सौरभ मुखर्जी का कहना है कि यह एक ऐसा सेक्टर है जिसने लगातार 20 साल तक भारी तेजी देखी है, लेकिन अब यह ढांचागत सुस्ती (स्ट्रक्चरल स्लोडाउन) के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुस्ती एआई के लोकप्रिय होने से बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। दूसरी तरफ, रियल एस्टेट कंसल्टेंट विशाल भार्गव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, "छंटनी के इस तनावपूर्ण माहौल का हाउसिंग मार्केट पर दोहरा और नकारात्मक असर पड़ता है। जिन कर्मचारियों की नौकरी चली गई है, उन्हें अपने घर की ईएमआई चुकाने में भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं, जो कर्मचारी अभी सुरक्षित हैं, वे भी इस डर में जी रहे हैं कि अगला नंबर उनका हो सकता है। इसी अनिश्चितता के चलते वे घर खरीदने के अपने फैसले को पूरी तरह से टाल रहे हैं।"
ओरेकल और अन्य आईटी कंपनियों में हो रही इस छंटनी का सबसे पहला और सीधा असर बेंगलुरु के रियल एस्टेट बाजार पर देखने को मिल रहा है। ऐतिहासिक रूप से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और दिल्ली-एनसीआर में रियल एस्टेट की मांग आईटी कर्मचारियों की आय पर निर्भर रही है। लेकिन अब, आईटी प्रोफेशनल्स महंगे घर खरीदने से कतरा रहे हैं। रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अब अपनी वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़े निवेश को रोक रहे हैं और कम बजट वाले घरों की तरफ अपना रुख कर रहे हैं।
वित्तीय बाजारों में भी इस नकारात्मक बदलाव का असर साफ नजर आ रहा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में साल 2026 में अब तक करीब 25 प्रतिशत की भारी गिरावट आ चुकी है। आईसीआईसीआई डायरेक्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेक्टर एक ऐसे दौर में जा रहा है जहां ऑटोमेशन इंसानी काम को कम कर देगा। एक अनुमान के मुताबिक भारत के 80 अरब डॉलर के आईटी राजस्व पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
इस छंटनी के बीच एक बेहद चिंताजनक अध्ययन भी सामने आया है। 'सिट्रिनी रिसर्च' की 'द 2028 ग्लोबल इंटेलिजेंस क्राइसिस' नामक रिपोर्ट में एक गंभीर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर एआई इसी तरह तेजी से आगे बढ़ता रहा, तो साल 2028 तक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , इन्फोसिस और विप्रो जैसी बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। वैश्विक क्लाइंट्स अब एआई कोडिंग एजेंट्स की तरफ जा रहे हैं, जिनकी लागत मात्र बिजली के खर्च के बराबर है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भारत का 200 अरब डॉलर का आईटी एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है, जिससे भारतीय रुपये में भी भारी गिरावट आ सकती है।
Published on:
01 Apr 2026 03:49 pm
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
