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Financial Year 2026-27: भारत में वित्त वर्ष 1 अप्रैल से ही क्यों शुरू होता है, 1 जनवरी से क्यों नहीं?

Financial Year 2026-27: भारत में अंग्रेजों के समय से वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता रहा है। अमेरिका में वित्त वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Apr 01, 2026

Financial Year 2026-27

भारत में वित्त वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। (PC: AI)

Financial Year 2026-27: दुनिया 1 जनवरी को नया साल मनाती है। पटाखे फूटते हैं, जश्न होता है। लेकिन भारत में सरकार, कंपनियां, टैक्सदाता और पूरा वित्तीय तंत्र अपना असली नया साल ठीक तीन महीने बाद यानी 1 अप्रैल को मनाता है। यह परंपरा इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि ज़्यादातर लोग कभी पूछते ही नहीं कि आखिर ऐसा क्यों है। नौकरीपेशा लोग इसी के हिसाब से टैक्स बचाते हैं, कंपनियां इसी तारीख पर अपने खाते बंद करती हैं और सरकार का बजट भी इसी चक्र के इर्द-गिर्द घूमता है। तो आखिर अप्रैल से मार्च का यह सायकल कहां से आया?

अंग्रेजों की देन है यह सायकल

बात अंग्रेजों के जमाने की है। भारत पर राज करते वक्त उन्हें सबसे ज़्यादा चिंता एक चीज की थी, खेती से मिलने वाला राजस्व। उस दौर में जमीन का लगान यानी land revenue सरकार की कमाई का सबसे बड़ा जरिया था। जून-जुलाई में बुआई होती है। मानसून आता है। अक्टूबर से मार्च तक कटाई चलती है। मार्च के अंत तक सरकार को पता चल जाता था कि फसल कैसी रही, राजस्व कितना आएगा। इसीलिए अप्रैल से नए हिसाब-किताब की शुरुआत होती थी। साथ ही ब्रिटेन में भी अप्रैल से टैक्स का साल शुरू होता था। यह परंपरा वहां सदियों पुरानी है। तो जो नियम इंग्लैंड में था, वही धीरे-धीरे भारत में भी लागू हो गया।

एक और दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल का महीना हिंदू पंचांग के नए साल यानी वैसाखी और कई राज्यों के अपने नव वर्ष के आसपास भी पड़ता है। ऐसे में यह तारीख सिर्फ अंग्रेजों द्वारा थोपी हुई नहीं थी, इसकी जड़ें यहां की मिट्टी में भी थीं।

कई देश फॉलो करते हैं यह सायकल

इसके अलावा, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम, हांगकांग और जापान जैसी कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी इसी फाइनेंशियल ईयर सिस्टम को फॉलो करती हैं। उधर अमेरिकी संघीय सरकार का वित्त वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है। यह दिखाता है कि दुनिया भर में वित्त वर्ष अक्सर कैलेंडर वर्ष के बजाय प्रशासनिक सुविधा और व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर तय किया जाता है।

आजादी के बाद भी क्यों नहीं बदला?

1947 में आज़ादी मिली, लेकिन अप्रैल-मार्च का चक्र वैसे का वैसा रहा। वजह साफ थी। देश तब भी खेती पर टिका हुआ था। मानसून अच्छा रहा या बुरा, इसका असर महंगाई से लेकर ग्रामीण मांग तक हर चीज पर पड़ता था। अप्रैल की शुरुआत से नीति-निर्माताओं के हाथ में एक पूरे कृषि चक्र का डेटा होता था।

बजट के साथ खाता है मेल

सरकार के बजट के साथ भी यह खूब मेल खाता है। बजट फरवरी में पेश होता है, संसद से मंजूरी मिलती है और 1 अप्रैल से लागू हो जाता है। 2017 से बजट की तारीख 1 फरवरी कर दी गई, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में ही खर्च का रास्ता खुल जाए और सड़कें बनना, योजनाएं चलना, सब कुछ बिना देरी शुरू हो सके।

जनवरी से क्यों नहीं शुरू करते वित्त वर्ष?

यह सवाल कई बार उठा है। कुछ लोग कहते हैं कि कैलेंडर साल और वित्त वर्ष एक हो जाएं तो दुनिया से तुलना आसान होगी। लेकिन यह बदलाव उतना सरल नहीं, जितना लगता है। इसके अलावा, इस तरह के बदलाव से ट्रांजिशन अकाउंटिंग और अनुपालन (कॉम्प्लायंस) से जुड़ी कई जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं।