
अयोध्या राम मंदिर (फाइल फोटो - आईएएनएस)
Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट में कई अहम खुलासे होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट और जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, चोरी को अंजाम देने के लिए कई तरीके अपनाए गए। इनमें काउंटिंग रूम में गुप्त कैमरे लगने के बाद सामने आई कथित गतिविधियों से लेकर बाथरूम में नकदी छिपाने और बैंक खातों तक पैसे पहुंचाने जैसे कई पहलू शामिल हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट को तब गड़बड़ी का शक हुआ जब दानपात्रों से निकली रकम और बैंक में जमा राशि के बीच अंतर दिखाई देने लगा। इसके बाद काउंटिंग रूम में गुप्त कैमरे लगाए गए। सूत्रों का दावा है कि इन कैमरों की फुटेज में एक कर्मचारी CCTV कैमरे के सामने खड़ा होकर दृश्य को ढक देता था, जबकि दूसरा कर्मचारी नोटों के बंडलों से नकदी निकालकर अपने कपड़ों में छिपा लेता था।
SIT की अंतरिम रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों का कहना है कि चोरी का एक और तरीका भी अपनाया जाता था। आरोप है कि गिनती के दौरान कुछ बंडलों में अतिरिक्त नोट रख दिए जाते थे। उस समय केवल बंडलों की संख्या का मिलान किया जाता था। हर बंडल में मौजूद नोटों की अलग से गिनती नहीं होती थी। बाद में बैंक ले जाते समय अतिरिक्त नोट निकाल लिए जाते थे। इस तरह रिकॉर्ड और बैंक में जमा रकम का हिसाब मेल खाता रहता था जबकि पर नकदी निकाल ली जाती थी।
SIT की अंतरिम रिपोर्ट का हवाला देते हुए सूत्रों ने दावा किया है कि चोरी के बाद नकदी को पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपाया जाता था। बाद में मौका मिलने पर उसे परिसर से बाहर ले जाकर दूसरी जगह बांट दिया जाता था। सूत्रों के मुताबिक, यह तरीका लंबे समय से अपनाया जा रहा था। रिपोर्ट में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच CCTV फुटेज में चोरी की करीब 70 घटनाएं दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कुछ बैंक अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ आरोपी कथित तौर पर चोरी की गई रकम अपने बैंक खातों में जमा करते थे। इसके अलावा, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के जेवर जैसे - बालियां, नथ, चूड़ियां और पायल भी गायब किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
SIT की अंतरिम रिपोर्ट के मुताबिक, नकदी गिनने वाली टीम के कई सदस्यों की नियुक्ति सिफारिश के आधार पर हुई थी। सूत्रों का दावा है कि टिन्नू यादव ने अपने रिश्तेदार मनीष यादव को काउंटिंग टीम में लगवाया था जबकि अनुकल्प मिश्रा ने अपने साले लवकुश मिश्रा की नियुक्ति कराई थी।
रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके मुताबिक, ड्यूटी खत्म होने के बाद कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी। CCTV कवरेज पर्याप्त नहीं थी और नकदी गिनने की प्रक्रिया की निगरानी में भी कई कमियां थीं। पिछले तीन वर्षों के आंतरिक ऑडिट रिकॉर्ड की समीक्षा में भी कई विसंगतियों की ओर इशारा किया गया है।
इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। मीडिया रिपोर्टों में 7 से 7.5 करोड़ रुपये तक की हेराफेरी की बात कही गई है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक करीब 70 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं और उनकी गिनती जारी है। जांच एजेंसियां इस मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
Published on:
26 Jun 2026 09:22 pm
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