
रवनीत सिंह बिट्टू (फाइल फोटो - आईएएनएस)
Ravneet Bittu Resignation:केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। रवनीत सिंह बिट्टू केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं।
माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी उन्हें आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में अहम जिम्मेदारी दे सकती है। पार्टी में वह बड़ा सिख चेहरा भी हैं। वहीं, कुछ दिनों पहले भाजपा की एक बैठक में यह बात साफ तौर पर सामने आई थी कि पंजाब यूनिट के पार्टी कार्यकर्ता व कई नेता इस बार अकेले चुनाव लड़ने के मूड में हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा किसी राजनीतिक विवाद की वजह से नहीं बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत हुआ है। वह राज्यसभा सदस्य बनने के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल हुए थे। जून 2026 में उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया और उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया गया। ऐसे में संसद की सदस्यता समाप्त होने के बाद उनका मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं था।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रियों की नियुक्ति और इस्तीफा स्वीकार करते हैं। वहीं, संविधान के प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति यदि संसद का सदस्य नहीं है तो वह अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इसके बाद उसे या तो संसद का सदस्य बनना होता है या मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। इसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बिट्टू का इस्तीफा स्वीकार किया गया।
रवनीत सिंह बिट्टू 2024 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल में रेल राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह राज्यसभा के जरिए संसद पहुंचे और केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्री पद से मुक्त होने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू अब पंजाब की राजनीति पर अधिक ध्यान दे सकते हैं। अगले साल प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा राज्य में अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में पार्टी उन्हें चुनावी रणनीति और संगठन विस्तार में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
Updated on:
25 Jul 2026 07:17 am
Published on:
24 Jul 2026 08:32 pm
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