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UPI और IMPS के लिए नया नियम? अब तुरंत नहीं पहुंचेगा पैसा, धोखाधड़ी रोकने के लिए RBI ला रहा ‘वन आवर लैग’ फॉर्मूला

RBI One Hour Lag for UPI Over 10000: RBI का बड़ा प्रस्ताव- 10,000 रुपये से ऊपर के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर लग सकता है 1 घंटे का लैग। जानिए कैसे यह नियम UPI, IMPS और फ्रॉड पर असर डालेगा।

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भारत

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Rahul Yadav

Apr 09, 2026

RBI New Proposal on Digital Payments

RBI New Proposal on Digital Payments

RBI New Proposal on Digital Payments: डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 10,000 रुपये से ऊपर की रकम ट्रांसफर करते समय अब पैसा तुरंत खाते में पहुंचने के बजाय कुछ समय लग सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसमें बड़े ट्रांजैक्शन पर एक घंटे का लैग यानी देरी देने की बात कही गई है।

क्या है वन आवर लैग फॉर्मूला?

RBI के इस प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति 10,000 रुपये से ज्यादा की रकम किसी दूसरे खाते में भेजता है, तो बैंक उस ट्रांजैक्शन को तुरंत प्रोसेस करने के बजाय एक घंटे तक रोक सकता है।

इस दौरान ग्राहक के पास ट्रांजैक्शन को कैंसिल करने का विकल्प रहेगा। अगर बैंक को ट्रांजैक्शन संदिग्ध लगता है, तो वह ग्राहक से दोबारा पुष्टि भी मांग सकता है। हालांकि, मर्चेंट पेमेंट, ऑटो-डेबिट, NACH यानि नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस और चेक जैसी सेवाएं इस नियम से बाहर रखी जा सकती हैं।

RBI ने क्यों उठाया यह कदम?

RBI के अनुसार, देश में डिजिटल फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है। साल 2025 में ही 22,930 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी सामने आई है।

दिलचस्प बात यह है कि 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड वैल्यू का करीब 98.5% हिस्सा रखते हैं, जबकि ऐसे मामलों की संख्या कुल केसों का लगभग 45% ही है। यानी साफ है कि बड़े ट्रांजैक्शन ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसी वजह से RBI ने इन्हीं पर खास फोकस किया है।

कैसे काम करता है डिजिटल फ्रॉड?

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, आजकल ज्यादातर डिजिटल फ्रॉड किसी तकनीकी हैकिंग से नहीं, बल्कि लोगों को बहला-फुसलाकर किए जा रहे हैं। ठग खुद को बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं, जल्दीबाजी और डर का माहौल बनाते हैं और लोगों से खुद ही पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। इस तरह के मामलों को ऑथराइज्ड पुश पेमेंट (APP) फ्रॉड कहा जाता है। ऐसे में अगर ट्रांजैक्शन में थोड़ा समय मिल जाए, तो ग्राहक सोच-समझकर फैसला ले सकता है और ठगी से बच सकता है।

RBI के अन्य 3 बड़े प्रस्ताव

RBI ने इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग सुरक्षा उपाय सुझाए हैं। इनमें सीनियर सिटिजन्स और दिव्यांग लोगों के लिए 50,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर ट्रस्टेड पर्सन की मंजूरी जरूरी करने का प्रस्ताव है, ताकि वे किसी धोखाधड़ी का शिकार न बनें। इसके अलावा, एक साल में 25 लाख रुपये से ज्यादा की रकम आने वाले खातों पर अतिरिक्त जांच की बात भी कही गई है, जहां जरूरत पड़ने पर पैसे को शैडो क्रेडिट के रूप में रोका जा सकता है।

एक और अहम सुझाव किल स्विच का है, जिसके तहत ग्राहक एक क्लिक में अपने सभी डिजिटल पेमेंट चैनल बंद कर सकेगा। यह सुविधा धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत नियंत्रण पाने में मदद कर सकती है।

हालांकि, RBI ने यह भी माना है कि इन उपायों के साथ कुछ चुनौतियां भी होंगी। डिजिटल पेमेंट की सबसे बड़ी खासियत उसकी तुरंत होने वाली प्रक्रिया है, और इस तरह की देरी से यूजर अनुभव प्रभावित हो सकता है। साथ ही, ठग लोग ग्राहकों पर दबाव बनाकर ट्रांजैक्शन को वाइटलिस्ट भी करवा सकते हैं, जिससे इस सिस्टम की प्रभावशीलता कम हो सकती है।

फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और RBI ने इस पर लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। 8 मई तक इस पर राय दी जा सकती है, जिसके बाद केंद्रीय बैंक आगे के दिशा-निर्देश तय करेगा। कुल मिलाकर, यह कदम डिजिटल पेमेंट को थोड़ा धीमा जरूर बना सकता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे एक जरूरी और बड़ा बदलाव माना जा रहा है।