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ऑटो-डेबिट पेमेंट के RBI ने बदले नियम, हर बड़े ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

Reserve Bank of India ने ई-मैंडेट नियमों को सख्त करते हुए ऑटो-डेबिट पेमेंट में अतिरिक्त सुरक्षा लागू की है। अब हर रजिस्ट्रेशन और बड़े ट्रांजैक्शन पर AFA जरूरी होगा। यूजर्स को अधिक नियंत्रण मिलेगा, जबकि यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त रहेगी, जिससे डिजिटल भुगतान और सुरक्षित बनेगा।
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भारत

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Anurag Animesh

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Updated: 21 Apr 2026, 9:56 PM IST

RBI

RBI (फाइल फोटो)

RBI: देश में डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए RBI ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों में ई-मैंडेट (e-mandate) यानी ऑटो-डेबिट भुगतान को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया गया है। अब अगर आप किसी सब्सक्रिप्शन, बिल या निवेश के लिए ऑटो-डिडक्शन की सुविधा लेते हैं, तो सिर्फ एक बार की अनुमति काफी नहीं होगी। आपको एक अतिरिक्त सुरक्षा जांच यानी ‘एडिशनल फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन’ (AFA) भी पूरा करना होगा। आसान भाषा में समझें तो अब सिर्फ OTP या कार्ड डिटेल्स से काम नहीं चलेगा, एक और सुरक्षा परत जोड़ी गई है।

क्या बदला है नए नियमों में?


सबसे पहले, कोई भी ई-मैंडेट एक्टिव करने से पहले ग्राहक को एक बार रजिस्ट्रेशन करना होगा। लेकिन यह रजिस्ट्रेशन तभी पूरा माना जाएगा जब अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन सफल हो जाए। दिलचस्प बात यह है कि किसी भी ई-मैंडेट के तहत होने वाला पहला ट्रांजैक्शन अब इस अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुजरना ही पड़ेगा। यानी शुरुआत में सिस्टम पूरी तरह आपकी पुष्टि चाहता है।

बड़े पेमेंट पर ज्यादा सख्ती


अगर ऑटो-डेबिट के जरिए 15,000 रुपये से ज्यादा का भुगतान होता है, तो हर बार अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। वहीं कुछ खास बड़े भुगतान जैसे इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश या 1 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल, इन पर भी यह अतिरिक्त सुरक्षा लागू होगी।

यूजर्स को मिलेगी ज्यादा कंट्रोल


RBI ने इस बार यूजर्स को भी थोड़ा ज्यादा अधिकार दिया है। अब आप तय कर सकते हैं कि आपके खाते से अधिकतम कितना पैसा ऑटो-डेबिट हो सकता है। खासकर जब पेमेंट की राशि हर बार अलग-अलग होती हो (जैसे बिजली बिल), तब यह सुविधा काम आएगी। अगर आप किसी पुराने ई-मैंडेट में बदलाव करना चाहते हैं, तो फिर से ऑथेंटिकेशन करना होगा। यानी हर बदलाव को भी सिस्टम गंभीरता से लेगा।

कैंसिल या बदलने की पूरी आजादी


हर ई-मैंडेट की एक वैधता अवधि होगी। अच्छी बात ये है कि ग्राहक जब चाहे उसे बदल या बंद कर सकता है। बैंक या पेमेंट कंपनियों को यह सारी जानकारी साफ-साफ यूजर को देनी होगी, ताकि कोई भ्रम न रहे। RBI ने साफ किया है कि इस सुविधा के लिए ग्राहकों से कोई अलग फीस नहीं ली जाएगी। यानी सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन जेब पर बोझ नहीं पड़ेगा।