
26 जनवरी देश के राजनीतिक इतिहास में काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह दिन है जब देश ने औपचारिक रूप से 1950 में अपना संविधान अपनाया था। संविधान की रचना में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रस्तावना (Preamble) को “संविधान का परिचय-पत्र” भी कहा जाता है। वर्ष 1946 में 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में संशोधन किया गया था। इसमें समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता जैसे तीन नए शब्दों को जोड़ा गया था। प्रस्तावना देश के सभी नागरिकों के लिए नये, स्वतंत्रता, समानता को सुरक्षित करता है और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था।
भारत के संविधान में प्रस्तावना का विचार अमेरिका के संविधान से लिया गया था, जबकि इसकी भाषा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है। इस प्रस्तावना की शुरुआत 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है और '26 नवंबर 1949 अंगीकृत' पर खत्म होती है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना क्या है?
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा,
उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढाने के लिए,
दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0 को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
प्रस्तावना के मूल शब्द क्या हैं ?
संविधान के परिचय-पत्र के मूल शब्द हैं :
संप्रभुता (Sovereignty)
संप्रभुता शब्द का अर्थ है सर्वोच्च या स्वतन्त्र होना। भारत किसी भी विदेशी और आंतरिक शक्ति के नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त संप्रभुता सम्पन्न राष्ट्र है। यह सीधे लोगों द्वारा चुने गए एक मुक्त सरकार द्वारा शासित है तथा यही सरकार कानून बनाकर लोगों पर शासन करती है।
समाजवादी (Socialist)
ये शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह अपने सभी नागरिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करता है। जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबर का दर्जा और अवसर देता है।
धर्मनिरपेक्ष (Secular)
ये शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह सभी पन्थों की समानता और पान्थिक सहिष्णुता सुनिश्चित करता है। भारत का कोई आधिकारिक पन्थ नहीं है। यह ना तो किसी पन्थ को बढ़ावा देता है, ना ही किसी से भेदभाव करता है।
लोकतांत्रिक (Democratic)
इस शब्द का अर्थ है कि भारत एक स्वतंत्र देश है, जिसका अर्थ है कि सर्वोच्च सत्ता लोगों के हाथ में है। लोकतंत्र शब्द का प्रयोग राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र के लिए प्रस्तावना के रूप में प्रयोग किया जाता है।
गणराज्य (Republic)
एक गणराज्य या गणतंत्र में, राज्य का प्रमुख प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लोगों द्वारा चुना जाता है।
इसके अलावा न्याय (Justice), स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality) और भाईचारा (Fraternity) शब्द भी हैं जो मूल माने जाते हैं।
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Updated on:
26 Jan 2022 07:49 am
Published on:
24 Jan 2022 05:37 pm
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