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संयुक्त किसान मोर्चा की आज रामलीला मैदान में होगी महापंचायत, देशव्यापी आंदोलन पर होगा मंथन

Mahapanchayat : दिल्ली के प्रसिद्ध रामलीला मैदान में सोमवार 20 मार्च की सुबह 10 बजे से किसानों का मेला जुटेगा। यानि की किसानों की महापंचायत होगी।

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संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत कल रामलीला मैदान में होगी, देशव्यापी आंदोलन पर होगा मंथन

दिल्ली के प्रसिद्ध रामलीला मैदान में आज सुबह 10 बजे से किसानों का मेला जुटेगा। यानि की किसानों की महापंचायत होगी। इस महापंचायत किसान सुबह 10 बजे से शाम 3.30 बजे तक आपस में बैठक कर नई रणनीति पर मंथन करेगा। इस महापंचायत में यह फैसला होगा कि, देशव्यापी आंदोलन होगा या नहीं। इस दौरान किसान एमएसपी जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि केंद्र सरकार ने बीते 14 महीने में किसानों के लिए कुछ नहीं किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में में इसका ऐलान किया। साथ ही किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि, अगर दिल्ली पुलिस कल महापंचायत में आ रहे किसानों को रोकती है या परेशान करती है तो कोई बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। इस महापंचायत 32 किसान संगठन हिस्सा लेंगे। देश के कोने-कोने से किसान दिल्ली पहुंच रहे हैं।

सरकार ने की वादाखिलाफी - हनन मोल्ला

किसान नेता दर्शनपाल ने बताया कि, इस बारे में राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी दिया गया है। सरकार को किसानों की मांग याद रहनी चाहिए। किसान नेता हनन मोल्ला ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहाकि, आंदोलन खत्म किए जाने और लिखित के बाद भी सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया। किसान आंदोलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन के बाद 14 महीने पहले स्थगित कर दिया गया था। प्रधानमंत्री ने किसानों से वादा किया था कि उनकी सभी मांगें मान ली जाएंगी। उनकी अपील के बाद किसानों ने दिल्ली सीमा खाली की थी।

किसानों की मांग रहेगी सबसे बड़ी चुनौती

2024 लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए किसान नेता दर्शनपाल ने कहा कि, अब मिशन कर्जा मुक्ति और मिशन एमएसपी चलेगा और तमाम राजनीतिक दलों के सामने किसानों की मांग सबसे बड़ी चुनौती होगी। संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया कि, दिल्ली महापंचायत में 500 किसानों के पहुंचने की उम्मीद है।

डॉ. आशीष मित्तल ने लगाया आरोप

संयुक्त किसान मोर्चा सेंट्रल कोआर्डीनेशन कमिटी के सदस्य डॉ. आशीष मित्तल का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उत्पादन की कुल लागत, यानी सी-2 व उस पर 50 फीसदी पर, न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी लागू करने का लिखित आश्वासन दिया था। लेकिन सरकार ने एक समिति बनाई जिसमें 26 सदस्य ऐसे थे जो कॉर्पोरेट के पक्ष में थे और इस मांग का खुलकर विरोध कर रहे थे। तब से उनकी सरकार ने फॉस्फेटिक उर्वरकों की कीमतों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की है और खाद्य सब्सिडी और मनरेगा बजट में भी भारी कटौती की है।

किसानों की मांगें -

- ऋण माफ करे सरकार।
- कृषि में कॉर्पोरेट व विदेशी कम्पनियों पर लगे रोक ।
- कृषि प्रोसेसिंग में विदेशी कम्पनियों पर लगे रोक।
- खाद्य आपूर्ति में विदेशी कम्पनियों पर लगे रोक।
- पम्पिंग सेट के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली।
- किसानों को 5000 रुपए प्रति माह पेंशन ।
- आंदोलन में दर्ज मुकदमे वापस ले सरकार ।
- कृषि भूमि में विदेशी निवेश पर रोक लगे।

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