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‘ I Love You कहना यौन उत्पीड़न नहीं, जब तक कि…’, बॉम्बे हाई कोर्ट ने युवक को किया बरी

Bombay High Court: नागपुर की कोर्ट ने 2017 में युवक को दोषी पाया और तीन साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही 5 हजार रुपये का भी जुर्माना लगाया।

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भारत

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Ashib Khan

Jul 01, 2025

I Love You कहना यौन उत्पीड़न नहीं- बॉम्बे हाई कोर्ट (Photo-IANS)

Bombay High Court: किसी युवती या महिला से आई लव यू (I Love You) कहना यौन उत्पीड़न नहीं है, जब तक कि शब्दों के साथ ऐसा आचरण न हो जो स्पष्ट रूप से यौन इरादे को दर्शाता हो। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की है। किशोरी से छेड़छाड़ के मामले में पीठ सुनवाई कर रही थी। इस मामले में पीठ ने युवक को बरी कर दिया। युवक को बरी करते हुए पीठ ने कहा कि आई लव यू जैसे शब्द अपने आप में यौन इरादे के बराबर नहीं होंगे।

क्या है पूरा मामला 

बता दें कि यह मामला 23 अक्टूबर को नागपुर के खापा गांव में घटी एक घटना से जुड़ा हुआ है। नाबालिग लड़की अपने चचेरे भाई के साथ स्कूल से घर लौट रही थी। उसी समय एक युवक ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया कि उसने लड़की का हाथ पकड़ा और नाम पूछा। इसके अलावा उसने कहा- आई लव यू। 

पिता ने दर्ज कराई शिकायत

घटना के बाद लड़की ने अपने पिता को पूरा मामला बताया। पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। मामले में जांच के बाद युवक पर आईपीसी की धारा 354 ए (1) (आई) (शारीरिक संपर्क बनाने और अवांछित यौन प्रस्तावों के साथ आगे बढ़ने के लिए), धारा 354 डी (1) (आई) (पीछा करना) और पोक्सो अधिनियम की धारा 8 (बिना प्रवेश के नाबालिग के साथ शारीरिक संपर्क से जुड़ा यौन उत्पीड़न) के तहत आरोप लगाया गया।

2017 में तीन साल की सुनाई सजा

मामले में नागपुर की कोर्ट ने 2017 में युवक को दोषी पाया और तीन साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही 5 हजार रुपये का भी जुर्माना लगाया। युवक ने इसके बाद हाई कोर्ट में अपील की। युवक ने अपील करते हुए कहा कि उसका यौन इरादा नहीं था और पीछा करने के लिए बार-बार संपर्क भी नहीं किया गया। साथ ही निजी अंगों को भी नहीं छुआ। 

पीठ ने क्या कहा

पीठ ने कहा कि आई लव यू को यौन प्रेरित कृत्य नहीं माना जा सकता, जब तक कि अन्य परिस्थितियां इसका समर्थन न करें जो यौन संपर्क में शामिल होने या उसे जारी रखने के इरादे को इंगित करती हों।जहां तक ​​पीछा करने के आरोप का सवाल है, उच्च न्यायालय ने कहा कि कथित कृत्य केवल एक बार हुआ था और इसमें बार-बार पीछा करना या संवाद करने का प्रयास शामिल नहीं था।