
Shashi Tharoor (Photo - ANI)
ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) की वजह से मिडिल ईस्ट में तबाही मच चुकी है और जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। इस युद्ध की वजह से सबसे ज़्यादा नुकसान ईरान को ज़्यादा नुकसान को हुआ है, जहाँ 2,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और देश के कई बड़े सैन्य ठिकानों, मंत्रालयों और तेल-गैस ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। ईरान भी पलटवार करते हुए इज़रायल और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बना रहा है। इस युद्ध की वजह से दुनियाभर में ऊर्जा संकट (Energy Crisis) पैदा हो गया है और भारत में भी इसका असर दिख रहा है। इस मामले पर कांग्रेस (Congress) के एक सांसद ने बड़ा बयान दिया है।
तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने ईरान युद्ध की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर बात करते हुए कहा कि अगर यह युद्ध लंबा चला, तो देश की अर्थव्यवस्था ओर इसका असर पड़ेगा। उनके अनुसार इस युद्ध का असर देश की सभी आर्थिक गतिविधियों पर एक चेन रिएक्शन की तरह हो रहा है। थरूर ने कहा कि अगर फैक्ट्रियाँ धीमी पड़ने लगती हैं, तो इसका असर रोजगार पर पड़ेगा और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
ऊर्जा संकट के गंभीर होने और भारत पर इसके असर को देखते हुए थरूर ने एक बड़ी सलाह दी। थरूर ने कहा कि भारत को दुनियाभर में फैले इस ऊर्जा संकट को देकते हुए अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधतता लाते हुए उन्हें बढ़ाना होगा। थरूर ने कहा कि भारत दूसरे देशों के साथ ज़्यादा मुक्त व्यापार समझौते कर सकता है, जिससे देश का निर्यात पहले के मुकाबले ज़्यादा देशों तक और बेहतर शर्तों पर पहुंच सके। थरूर का यह भी मानना है कि ऊर्जा स्त्रोतों को बढ़ाने से देश के लिए विविधतता बढ़ेगी और युद्ध के लंबा खिंचने की स्थिति में भी भारत के पास इस संकट से निपटने के लिए कई ऑप्शंस उपलब्ध रहेंगे। थरूर, जो विदेश मामलों पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि ज़्यादा ऑप्शंस होने से देश संकट की स्थिति में भी सहज रहेगा।
Published on:
20 Mar 2026 11:04 am
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