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मोदी सरकार की एक बार फिर मुरीद हुई शेहला रशीद, 15 दिन में दूसरी बार की तारीफ

Jammu & Kashmir news: शेहला रशीद ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने श्रीनगर में हुए विकास कार्यों की कुछ तस्वीरें शेयर की और लिखा कि अपने शहर की कायापलट होते देखकर अच्छा लगा।

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 Shehla Rashid praised modi government praised second time in 15 days

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की पूर्व स्टूडेंट और उपाध्यक्ष शेहला रशीद एक बार फिर से मोदी सरकार की मुरीद हो गई है। उन्होंने बुधवार को एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर में हो रहे विकास कार्यों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की तारीफ की है। बता दें कि शेहला अपनी शुरुआती जीवन से ही मोदी सरकार की नीतियों की कट्टर विरोधी रही है। हालांकि वह पिछले कई महीनों से बदली हुई नजर आ रही है।


अपने शहर की कायापलट होते देखकर अच्छा लगा

दरअसल, बुधवार को शेहला रशीद ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने श्रीनगर में हुए विकास कार्यों की कुछ तस्वीरें शेयर की और लिखा कि अपने शहर की कायापलट होते देखकर अच्छा लगा। अंदरूनी शहर में भीड़भाड़ कम करने का निर्णय पैदल यात्रियों और खरीदारों के लिए वास्तव में मददगार साबित हुआ है। बहुत कम प्रदूषण, शोर आदि। बेहतर पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाएं।'' रशीद ने स्मार्टसिटी, यूरोप फील्स, श्रीनगर आदि के हैशटैग का भी इस्तेमाल किया। शेहला ने इस पोस्ट के साथ एलजी मनोज सिन्हा, उनके दफ्तर के अकाउंट, पीएमओ का अकाउंट और श्रीनगर के डीएम का अकाउंट को भी टैग किया है।

15 दिन के भीतर दूसरी बार की तारीफ

बता दें कि शेहला ने 15 दिन के भीतर दूसरी बार मोदी सरकार की तारीफ की है। इससे पहले 14 अक्टूबर को शेहला ने कश्मीर को लेकर मोदी सरकार की तारीफ की थी। उन्होंने एक्स पर किए एक पोस्ट में कहा था कि मोदी सरकार के नेतृत्व में कश्मीर के हालात सुधरे हैं और लोगों की जिंदगियां बच रही हैं। मेरा मानना है कि सरकार के स्पष्ट रुख ने कुल मिलाकर जीवन बचाने में मदद की है। यह मेरा दृष्टिकोण है।

370 को चुनौती देनी वाली याचिका से नाम वापस लिया

वहीं, जम्मू-कश्मीर से चार साल पहले आर्टिकल 370 को रद्द किए जाने को लेकर भी उन्होंने पहले चुनौती दी थी। लेकिन जब सुनवाई का समय आया था तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से अपना नाम वापस ले लिया था। इसके अलावा, नौकरशाह शाह फैसल का भी नाम याचिका से हटा दिया गया था।

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